शिमला. सत्ता में डबल इनिंग का ख्वाब देख रही सत्तारूढ़ भाजपा में मंत्र फूंकने के लिए नितिन गडकरी के दो गण जगत प्रकाश नड्डा व श्याम जाजू शिमला आएंगे। डैमेज कंट्रोल के तहत आलाकमान ने माना है कि संगठन व सरकार में तालमेल का अभाव है।
इस खामी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय महामंत्री नड्डा व प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी जाजू मंत्रियों, विधायकों और कार्यकारिणी पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। हरेक नेता की ओर से आने वाले विचार को लेकर रिपोर्ट भी तैयार होगी। यह समीकरण महेश्वर सिंह के हिमाचल लोकहित पार्टी के गठन के बाद पैदा हुए हैं।
बुधवार रात अशोका रोड स्थित गडकरी के आवास पर आयोजित बैठक दो घंटे से अधिक समय तक चली। रात 9 बजे शुरू हुई बैठक 11 बजे तक चली। इस बैठक में गडकरी के अतिरिक्त मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शांता कुमार, महामंत्री जेपी नड्डा और पार्टी के प्रदेश सह प्रभारी श्याम जाजू ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि परिवार नहीं राजनीतिक परिवार बढऩा चाहिए। कुनबे से नाराज लोगों के कारण न हो तो पार्टी और न संगठन मजबूत होता है। राष्ट्रीय महामंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। विचार-विमर्श से हर तरह की परेशानी का हल निकलेगा।
रविवार 12 फरवरी को पार्टी राष्ट्रीय महामंत्री जेपी नड्डा और राज्य के सह प्रभारी श्याम जाजू शिमला में कार्यकर्ताओं व पार्टी नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगे। विचार-विमर्श का काम मंगलवार 14 फरवरी तक चलेगा। पार्टी ने अभी तक तय नहीं किया है कि नेताओं के दिलों में घर कर गई खटास दूर करने के लिए बैठक पार्टी मुख्यालय या फिर पीटरहॉफ में होगी।
डैमेज कंट्रोल को लेकर दिल्ली की बैठक से साफ हो गया है कि प्रदेश भाजपा सरकार का कोई एक मंत्री नहीं हटेगा। न ही प्रदेश में संगठन में कोई बदलाव किया जाएगा। पार्टी अध्यक्ष खीमी राम विधानसभा चुनाव में संगठन का नेतृत्व करेंगे। तर्क है कि चुनाव के लिए गिनती के महीने बचे हैं। ऐसे में किसी तरह का बदलाव विपक्ष को सहारा दे सकता है।
प्रदेश भाजपा की होने वाली बैठकों में शांता कुमार दो साल से शामिल नहीं हो रहे हैं। संभावना है कि नए डैमेज कंट्रोल फार्मूले के तहत आलाकमान की टीम के दौरे के समय भी शांता नदारद रहे। ऐसा माना जा रहा है कि अशोका रोड स्थित गडकरी निवास पर आयोजित बैठक में सरकार में भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद होने पर भी मामूली चर्चा हुई। शांता समर्थकों के माथे की लकीरें अब भी बनी हुई हैं।
आलाकमान ने माना है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की जरूरत है। चुनावी वर्ष होने के कारण जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ चिंतन करना आवश्यक है। ऐसे लोगों की ओर से आने वाले सुझावों पर अमल किया जाए। सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता है। बैठक में निर्णय लिया गया कि ्रतालमेल से बनने वाली रणनीति को लागू करने की रूप रेखा भी तैयार की जाए।