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इंसाफ में देर: बरसों से सिर्फ तारीख पर तारीख

अशोक चौहान | Dec 30, 2012, 06:49AM IST
इंसाफ में देर: बरसों से सिर्फ तारीख पर तारीख
शिमला। हिमाचल में महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ करने वाले महज 12 फीसदी दरिंदों को ही सजा मिल पाई है। सात साल से दुष्कर्म के सैकड़ों केस प्रदेश की अदालतों में चल रहे हैं लेकिन पुख्ता सबूत न होने से पीड़ितों को मिलती है तो सिर्फ तारीख पर तारीख, फैसला नहीं।  
 
हालत यह है कि सात साल के दौरान दर्ज हुए दुष्कर्म के 1243 मामलों में से महज 150 अपराधियों को ही सजा मिल पाई है। प्रदेश पुलिस के आंकड़े इसका खुलासा कर रहे हैं।
 
प्रदेश में दुष्कर्म के मामलों की बात करें तो वर्ष 2005 से लेकर अब तक 1093 दुष्कर्म के मामले प्रदेश की अदालतों में लंबित हैं। इसके अलावा कुल 100 मामले सबूतों के अभाव, आपसी समझौते के चलते रद्द भी कर दिए हैं। इनमें से कुछ मामलों में पुलिस जांच भी कर रही है और कोर्ट में पेश नहीं किया गया है। जांच प्रक्रिया लंबी होने से महिलाओं को काफी साल बाद जाकर न्याय मिल पा रहा है।
 
पिछले सात साल के दौरान प्रदेश में कुल 1243 मामले दर्ज हुए। वर्ष 2009 में सबसे ज्यादा 182 मुकदमे दर्ज किए गए। अधिकतर मामले कांगड़ा, सोलन और शिमला जिले के हैं। इनमें से 158 मामले कोर्ट में चल रहे हैं जबकि 14 आरोपियों को सजा मिल चुकी है।
 
इस साल एक भी सजा नहीं
 
प्रदेश में इस साल नवंबर माह तक दुष्कर्म के 165 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने इनमें से 101 मामले कोर्ट में भेज दिए हैं जबकि 64 मामलों में जांच चल रही है। इस साल किसी भी अपराधी को सजा नहीं हो पाई है और सभी अंडर ट्रायल हैं। शिमला में भी इस साल दुष्कर्म के 11 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
 
अभी तक सबसे ज्यादा 12 साल सजा
 
प्रदेश में दुष्कर्म के मामलों में अब तक ज्यादातर अपराधियों को अधिकतम सात साल की सजा हुई है। प्रदेश पुलिस विभाग के अनुसार मंडी जिले में कुछ साल पहले पोती से दुराचार करने वाले एक व्यक्ति को कोर्ट ने 12 साल की सजा सुनाई थी। यह प्रदेश में अब तक दुष्कर्म के किसी मामले में दी गई अधिकतम सजा है।
 
मूक बधिर लड़कियों के मामले में तीन साल बाद मिला न्याय
 
राजधानी में सबसे सनसनीखेज मामले में महज तीन साल में न्याय मिला। टुटू में सामाजिक संस्था प्रेरणा में पढ़ने वाली मूक बधिक युवतियों के साथ प्रबंधन के ही अधिकारियों ने कई महीनों तक दुराचार किया। आखिरकार फरवरी 2009 में संजौली की छात्रा शिखा सूद ने पुलिस के पास इसका खुलासा किया और सभी आरोपी पकड़े गए। जनता की सुर्खियों में रहे इस मामले में पुलिस ने जांच भी जल्द पूरी की। मामला कोर्ट में चला और इसी साल मुख्य आरोपी को सात साल कठोर कारावास की सजा मिली।
 
महिला तस्करी के मामलों में भी धारा 376
 
प्रदेश में वूमेन ट्रैफिकिंग से जुड़े मामलों में भी धारा 376 लगाई जाती है। ऐसे मामले बहुत कम हैं लेकिन पुलिस ट्रैफिकिंग की शिकायत मिलने पर आरोपी के खिलाफ यह धारा लगा देती है। इस पहल के लिए पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर शाबाशी भी मिल चुकी है।
 
फास्ट ट्रैक की संख्या में हो इजाफा
 
पूर्व वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेंद्र किशोर शर्मा का कहना है कि  अन्य राज्यों की अपेक्षा में प्रदेश में रेप जैसे अपराध के मामले कम हैं और उनकी पेंडेंसी भी कम है, लेकिन ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो उसके लिए प्रदेश में सरकार को अधिक से अधिक फास्ट ट्रैैक कोर्ट खोलने चाहिए। तभी इस तरह के अपराधों में भी कमी आएगी। इसके अलावा फास्ट ट्रैक में सरकार सरकारी वकीलों की तैनाती करे और उन्हें इनसे जुड़ी स्पेशल ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए।
 
आंकड़े बताते हैं
 
1243 पिछले सात सालों में दुष्कर्म के मामले
 
150 अपराधियों को ही मिल पाई सजा
 
1093 मामले अभी भी अदालत में लंबित
 
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