शिमला.प्रदेश के एक मात्र महिला एवं शिशु रोग अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत पूरी दवाई नहीं मिल रही है। डॉक्टर एक माह की दवाई लिखते हैं, लेकिन उन्हें पांच दिन ही दवाई ही औषाधालय से मिल रही है।
गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं के लिए चलाई गई यह योजना अस्पताल में अधूरी नजर आ रही है। यही नहीं सिजेरियन के समय भी प्रयोग में आने वाले ड्रिप सेट भी परिजनों से ही मंगवाए जा रहे हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की इस योजना की खामियों के बारे में स्वास्थ्य विभाग को कई बार बताया जा चुका है। बावजूद इसके प्रदेश भर से यहां गर्भावस्था के दौरान जांच करवाने वाली महिलाओं को राहत नहीं मिल पाई है।
अस्पताल की गर्भावस्था जांच ओपीडी में हररोज 150 से 175 महिलाएं जांच के लिए आ रहे हैं। जांच के बाद उन्हें आयरन और कैल्शियम की एक माह दवा लिखी जाती है,मगर दवाओं के संकट के चलते उन्हें केवल पांच पांच दिन की दवा मिल रही है।
ऐसे में जिस महिला को अपनी जांच के लिए एक माह अस्पताल आना चाहिए। उसे दवाई के लिए बार बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचने का किराया और प्रसव तक निशुल्क इलाज देने का प्रावधान है।
योजना के शुरुआती दौर में ऐसी समस्या पेश आ रही है,लेकिन विभाग का प्रयास है कि इस समस्या को जल्द दूर कर दिया जाएगा। प्रदेशभर में इस योजना को सुदृढ़ बनाया जाएगा।- राकेश कंवर, निदेशक स्वास्थ्य मिशन