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एक तरफ राजनीति दूसरी तरफ देवनीति

गौरीशंकर | Oct 25, 2012, 10:21AM IST
एक तरफ राजनीति दूसरी तरफ देवनीति

तीन दशकों से अधिक समय से भाजपा को प्रदेश में तन-मन-धन से सींचने वाले कदावर नेता महेश्वर सिंह के लिए इससे बड़ी परीक्षा की घड़ी और क्या हो सकती है। एक तरफ अपने पूरे राजनीतिक करिअर की प्रतिष्ठा को कायम रखने का सवाल तो दूसरी तरफ सदियों पुरानी देव परंपरा निभाने का समय।



यदि राजनीति के लिए समय निकालते हैं तो देव परंपरा खंडित हो जाएगी और देवपरंपरा का निर्वाहन किया तो राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। भाजपा को अलविदा कहने के बाद प्रदेश में हिलोपा का गठन करने वाले महेश्वर सिंह भगवान रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार हैं और दशहरा उत्सव के दौरान सात दिनों तक उनकी देवी परंपरा निभाने के लिए अहम भूमिका रहती है।



लेकिन इस बार चुनावी बेला होने के कारण वे सात दिन राजनीतिज्ञों के लिए बहुत ही मायने रखते हैं लेकिन ऐसे में महेश्वर सिंह दोराहे पर खड़े हैं राजनीति के लिए समय निकालें या फिर सदियों पुरानी देव परंपरा को निभाएं।



हालांकि महेश्वर सिंह का कहना है कि वे इन सात दिनों में राजनीति न करके भगवान रघुनाथ जी की सेवा करेंगे। लेकिन लोगों में चर्चा है कि महेश्वर सिंह यदि रघुनाथ जी की सेवा में सात दिन बिताते हैं तो राजनीति में उनका नुकसान हो सकता है। राम सिंह, कांग्रेस के सुंदर ठाकुर और आजाद प्रेम लता ठाकुर इन दिनों प्रचार में जुटे हैं। महेश्वर उत्सव में शामिल होने के कारण वे दशहरा उत्सव के समाप्त होने तक चुनाव प्रचार नहीं कर पाएंगे।



रघुनाथ करेंगे नैया पार



दशहरा उत्सव के दौरान सात दिनों तक महेश्वर को भगवान रघुनाथ के साथ शिविर में अधिकतर समय बिताना होगा। वे कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से हिलोपा के प्रत्याशी हैं। महेश्वर मानते हैं कि वे भगवान रघुनाथ की सेवा में ये सात दिन बिताएंगे और वही उनकी नया पार लगाएंगे।



चुनाव आयोग की नजर



उत्सव के दौरान चुनाव आयोग की पैनी नजर रहेगी। दशहरा उत्सव के बहाने कोई भी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक रहेगी और चारों ओर कैमरे लगे होने से सभी गतिविधियां कैमरे में कैद होगी।

  
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