सामने आएगा सबसे लंबी वंशावली का सच
Source: विनोद भावुक | Last Updated 07:41(10/02/12)
मंडी. चंबा घाटी की धरोहरों के संरक्षण के लिए गुरु नानक देव युनिवर्सिटी अमृतसर आगे आई है। युनिवर्सिटी के गुरु रामदास स्कूल ऑफ प्लानिंग ने हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक नगर चंबा की धरोहरों के अध्ययन की योजना तैयार की है।
मानव सभ्यता के इतिहास के अपने तरह के इस नगर के अध्ययन से यहां स्थित हजारों वर्ष पुरानी धरोहरों के संरक्षण को बल मिलेगा। वही चंबा को वल्र्ड हेरिटेज सिटी बनाने की कवायद को भी बल मिलेगा । हिमाचल प्रदेश के नगर नियोजन विभाग की धरोहर संरक्षण सलाहकार समिति के सदस्य एवं रामदास स्कूल ऑफ प्लानिंग के प्रोफेसर बलविंदर सिंह ने पुष्टि की है कि हेरिटेज सिटी चंबा की स्टडी का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है।
ब्रिटिशकाल में उत्तरी भारत के पुरातत्व विभाग के प्रमुख बने शृंखला डच निवासी जॉन फिलिप वोगल ने चंबा के सांस्कृतिक इतिहास को पहली बार शृंखलाबद्ध किया। यूरोपियन इतिहासकार ए. कलिंघम ने वोगल को बताया था कि चंबा में इतिहास का समृद्ध खजाना छिपा है।
लाहौर कॉलेज के प्रोफेसर टी. डब्ल्यू अर्नोल्ड ने भी वोगल का चंबा के इतिहास पर काम करने की सलाह थी। पुरातन चंबा के इतिहास पर काम और शोध को वोगल ने 1902 में प्रकाशित अपनी पुस्तक (एंटीक्वीटीज ऑफ चंबा स्टेट) में प्रकाशित किया।