पर्यटन के सारे वादे झूठे , सरकार फिर हुई फेल

ऊना
जिला ऊना में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपार संभावनाएं हैं लेकिन अभी तक सरकार की ओर से किए गए सभी दावे और प्रयास खोखले साबित हुए हैं। जिले में पर्यटन को विकसित करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई और न ही इसके लिए कोई प्रयास किया गया। घोषणाएं तो अकसर होती रही हैं लेकिन उन पर अमल नहीं किय गया है।
रोजगार भी मिलता
मंदली से भाखड़ा और लठियानी से कोसरियां के बीच कई ऐसे स्थान हैं जहां गोबिंद सागर झील अपनी छटा बिखेरती है। झील से सटे दोनों क्षेत्रों में पर्यटन के नाम पर कुछ नहीं हो पाया है। इन क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता था। इससे स्थानीय लोगों की आर्थिकी सुदृढ़ होती और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध होते।
भाखड़ा से थानाकलां सड़क को चौड़ा करने की जरूरत है। लठियानी-कोडरा से शाहतलाई सड़क को चौड़ा करके बेहतर बनाने की आवश्यकता है। क्योंकि इसी सड़क से पंजाब से हजारों श्रद्धालु सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ और बच्छरेटू में शीश नवाने आते हैं।
इसी तरह बिलासपुर जिले के तहत भाखड़ा से नैना देवी सड़क को भी चौड़ा करने की जरूरत है। संकरी सड़क होने से दुर्घटना का हर समय अंदेशा रहता है।
आते हैं हजारों श्रद्धालु
वैसे भी इस सड़क पर कई ऐसे स्पॉट हैं, जहां से गोबिंद सागर अपनी छटा बिखेरती है। लेकिन इस क्षेत्र में भी पर्यटकों के लिए कुछ नहीं है। यह अलग बात है कि उत्तरी भारत की प्रसिद्ध शक्तिपीठ छिन्नमस्तिका धाम चिंतपूर्णी इस जिले की प्रमुख धार्मिक स्थल है।
जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए आते हैं। फिर भी इस धार्मिक स्थल पर सुविधाएं श्रद्धालुओं के लिए नाकाफी हैं। चिंतपूर्णी में अभी भी सुविधाओं में इजाफा करने की दरकार है। इसके अलावा कई प्रमुख धार्मिक स्थल हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।






