हिमाचल प्रदेश में व्हीकल टैक्स 15 से दोगुना
Source: प्रेम सूद | Last Updated 05:02(09/02/12)
धर्मशाला. प्रदेश में टैक्सियों, बसों, ट्रकों और ऑटो रिक्शा सहित निजी वाहनों पर टैक्स 15 फरवरी से लगभग दोगुना हो जाएगा। परिवहन विभाग ने वर्तमान टैक्स दरों में 100 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। परिवहन विभाग ने प्रदेश भर में वाहनों की नई टैक्स दरें निर्धारित करने के लिए 7 दिनों के भीतर वाहन मालिकों से इस संबंध में सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। हालांकि अब तक राजपत्र में प्रकाशित न होने से वाहन मालिकों को आपत्तियां दर्ज कराने का मौका ही नहीं मिल रहा।
परिवहन विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि आपत्तियां और सुझाव मिलें या न मिलें, प्रदेश भर में नई दरें 15 फरवरी से लागू होंगी। इसके अलावा निजी वाहनों के पंजीकरण शुल्क में भी 1 फीसदी वृद्धि की गई है। प्रधान सचिव परिवहन टीजी नेगी ने इसकी पुष्टि की है।
किस पर कितना टैक्स
छोटे कमर्शियल वाहनों पर टैक्स 1000-1500 को बढ़ाकर 3000 रुपए और 15 वर्ष पुराने वाहनों पर 5 हजार रुपए किया जाएगा। मध्यम वाहन पर 1500-2000 से बढ़ाकर 3000 और बड़े वाहनों पर 2000-2500 से बढ़ाकर 3500 रुपए करने का प्रस्ताव है। बड़ी बसों पर 400-500 प्रति सीट से बढ़ाकर 650, मिनी बसों पर 450-500 प्रति सीट बढ़ाकर 650, मैक्सी कैब पर 650-700 से 800, मोटर कैब पर प्रति सीट 300-350 से 450, ऑटोरिक्शा पर 150-200 से बढ़ाकर 300, निजी संस्थानों की बसों पर 450-500 से बढ़ाकर 650 रुपए किया जाएगा।
रिकवरी वैन के टैक्स में 5 से 7 हजार रुपए से बढ़ाकर 8000 रुपए टैक्स लगेगा। परिवहन विभाग के सेक्शन ऑफिसर रोशन लाल ने बताया कि उन्होंने इस अधिसूचना को तीन दिन पहले ही ई-गजट में प्रकाशन के लिए भेज दिया था, लेकिन ई-गजट में अभी तक इस अधिसूचना का प्रकाशन लंबित है। इसे वीरवार सुबह तक अपडेट कर दिया जाएगा।
पहले ही बढ़ चुकी है रजिस्ट्रेशन फीस
इससे पहले प्रदेश में पंजीकृत होने वाले वाहनों के विलंब से पंजीकरण करवाने पर शुल्क में 100 फीसदी वृद्धि की जा चुकी है। परिवहन विभाग नए वाहन के पंजीकरण की निर्धारित समयावधि के बाद पंजीकरण करवाने पर 30 दिनों से अधिक व 90 दिनों से कम समय में शुल्क 500 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए कर दिया है।
छह लाख वाहन
प्रदेश में कुल छह लाख वाहन हैं। इसमें दोपहिया वाहनों की संख्या तीन लाख है। बाकी कारें, जीप, ट्रक और बसें हैं। इनमें से करीब 50 फीसदी जीपें, कारें और छोटे वाहन हैं।