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इंतजार करो क्यों हारे सब पता चलेगा : धूमल

विक्रम ढटवालिया | Dec 21, 2012, 03:11AM IST

अश्वनी वालिया.


सरकार का आधार बनाने वाले कांगड़ा जिला की परफॉरमेंस इस बार सबसे खराब रही है। इसी कारण पार्टी को जो नुकसान हुआ है उसके निशाने पर अब पार्टी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार की भूमिका भी निशाने पर आ गई है।


मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के गृह जिला में भी पार्टी को इस बार पहले के मुकाबले एक और सीट का नुकसान हुआ है।


न तो इंडक्शन चूल्हे का जलबा चला और न ही विकास के दावों का जादू।


आखिर भाजपा की हार के कारणों की वजह कहां से तैयार हुई, क्या पार्टी की गुटबाजी इन चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहा या फिर मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल की खुद की परफॉरमेंस। भास्कर ने धूमल से कई मुद्दों पर चर्चा की।


ऐसे नतीजों की आपको क्या उम्मीद थी?


लोकतंत्र में जनादेश ही इसका आधार है। पांच साल में हमने जो किया उसी के बूते हमें सरकार रिपीट होने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन हम ही में कहीं न कहीं कोई कमी रही होगी जिस कारण कांग्रेस सत्ता में लौटी है।


इन सब विषयों पर पार्टी की बैठक में चर्चा होगी। जहां जिन जिलों में परफॉरमेंस खराब रही है। वहां के प्रमुख लोगों को भी इसका जवाब देना होगा।


लेकिन इन सब विषयों पर चिंतन पार्टी की बैठक में ही किया जाएगा।  पार्टी के बगावती लोगों ने बड़ी लीड के साथ जीत हासिल की, क्या पार्टी ने ईमानदार और अच्छी छवि वाले लोगों को इस बार तरजीह नहीं दी?


जिन लोगों की बड़ी जीत हुई है पार्टी के लोगों को उनसे सीख लेने की जरूरत है। कुछ स्थानों पर ऐसा हुआ होगा, लेकिन ये विषय अब सब पार्टी की बैठक के लिए ही महत्वपूर्ण रह गए हैं। हो सकता है कि जहां बदलाव होना चाहिए था उसमें चूक हुई है।


लेकिन पार्टी की इस हार पर हम सब दुखी हैं। कारण चाहे जो भी रहे हों। 


क्या वीरभद्र सिंह को निशाने पर रखकर भाजपा को चुनाव में नुकसान नहीं हुआ, क्या वीरभद्र की वजह से प्रदेश में भाजपा को नुकसान हुआ?


ऐसा नहीं है। व्यक्ति विशेष को लेकर भाजपा ने कोई भी प्रचार नहीं किया। भाजपा तो अपने विकास के मुद्दे पर वोट मांगती रही।


लेकिन जनता को चाहिए था हो सकता है उसने उसे च्यादा तरजीह दी। वीरभद्र के कारण पार्टी को कोई नुकसान नहींं हुआ।


भाजपा की बैठक में इन सब मुद्दों पर चर्चा होगी। पार्टी आत्म चिंतन भी करेगी। कारण क्या रहे हम सबको पता है।
 


क्या भाजपा ने वोटर की मर्ज को नहीं समझा?


ऐसा नहीं है। वोटर ने भाजपा के विकास को उतनी तबज्जो नहीं दी। इस पर पार्टी चिंतन करेगी कि आखिर वोटरों को अब चाहिए क्या। आने वाली सरकार से लोगों को अब  ज्यादा उम्मीदें हैं।


देखना यही है कि भाजपा के समय चलाए गए विकास कार्यों और योजनाओं को कांग्रेस सरकार किस गति और दिशा से चलाती है। देखेंगे कि कांग्रेस लोगों को देती क्या है।


बेरोजगारी भत्ता शायद युवाओं को ज्यादा उम्मीद लेकर आया होगा और इंडक्शन चूल्हे पर उन्होंने उतना गौर नहीं किया।

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