Home » Himachal » Shimla » Exam Forgery: Absent Student Become Topper

परीक्षा फर्जीवाड़ा: पेपर देने पहुंचा ही नहीं और बन गया था टॉपर

अशोक चौहान | Jan 07, 2013, 01:01AM IST
परीक्षा फर्जीवाड़ा: पेपर देने पहुंचा ही नहीं और बन गया था टॉपर
शिमला। विश्वविद्यालय में हुए परीक्षा फर्जीवाड़े में अब विश्वविद्यालय प्रशासन की परेशानी बढ़ सकती है। छात्रों की शिकायत के बाद स्टेट विजिलेंस ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए यह मामला सरकार को भेज दिया है।
 
मामले में बड़े अधिकारियों के खिलाफ जांच को देखते हुए विजिलेंस ने खुद केस दर्ज नहीं किया है और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार से मामला दर्ज करने की अनुमति मांगी है। ऐसे में अब सरकार की मंजूरी मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी समेत कई धाराओं के तहत मामले दर्ज हो सकते हैं।
 
क्लेरिकल मिस्टेक नहीं, मिलीभगत
 
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार छात्रों की ओर से सौंपे गए दस्तावेजों की जांच करने के बाद कई अहम तथ्य सामने आए हैं। यह फर्जीवाड़ा क्लेरिकल मिस्टेक न होकर कर्मचारियों और छात्रों की मिलीभगत लग रहा है।
 
वहीं, पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए इस फर्जीवाड़े के खिलाफ वर्तमान कांग्रेस सरकार विजिलेंस को केस दर्ज करने की अनुमति दे सकती है। ऐसे में परीक्षा शाखा के कर्मचारियों समेत कई बड़े अधिकारियों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। 
 
बिना परीक्षा के ही पास कर दिए थे छात्र
 
यूनिवर्सिटी के एमटीए विभाग के पांच छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही पास कर दिया था। ये पांचों छात्र 13 जून 2012 को हुई एमटीए सेकंड समेस्टर के डेस्टिनेशंस प्लानिंग की परीक्षा में गैरहाजिर रहे थे, लेकिन रिजल्ट में इन्हें पास बताया गया। अनुपस्थित रहा एक छात्र तो रिजल्ट में टॉपर बन गया।
 
रोलनंबर 1591, 1593, 1594, 1600 और 1608 परीक्षा में अनुपस्थित रहे थे और परीक्षा के दौरान लगने वाली अटेंडेंस शीट और इवेल्यूएशन ब्रांच के मेमो में भी इन्हें अनुपस्थित दर्शाया गया है। वहीं, हाल ही में घोषित किए गए रिजल्ट के गजट में इन छात्रों को पास घोषित किया गया।
 
आरटीआई में ली गई जानकारी के अनुसार इस विषय में रोलनंबर 1608 को 63 अंक, रोलनंबर 1600 को 32 नंबर, और 1591, 1593 और 1594 को गजट में आरएलआईए बताया गयाग, जबकि उन्होंने पेपर ही नहीं दिए थे।  
 
> 2012 जून को हुई एमटीए सेकंड समेस्टर के डेस्टिनेशन प्लानिंग की परीक्षा में थे गैरहाजिर।
 
> 05 छात्र थे परीक्षा में गैरहाजिर पर रिजल्ट में हो गए पास 
 
> 12 पेज की चार्जशीट एससीए भी मुख्यमंत्री को सौंपेगी
 
एनएसयूआई भी मुख्यमंत्री से मिलेगी
 
एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष यदुपति ठाकुर ने कहा कि इस फर्जीवाड़े को लेकर इकाई मुख्यमंत्री से मिलेगी और जांच की मांग करेगी। साथ ही अन्य फर्जीवाड़ों को लेकर भी जांच करवाई जाएगी। इसके अलावा विवि में जो भी गलत नियुक्तियां हुई हैं, उन्हें रद्द करवाया जाएगा।
 
एससीए भी सौंपेगी चार्जशीट
 
उधर, मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करवाने के लिए विवि एससीए भी मुख्यमंत्री को इस मामले की चार्जशीट सौंपने की तैयारी में है। एससीए अध्यक्ष राहुल चौहान का कहना है कि इस मामले में एससीए ने 12 पेज की चार्जशीट तैयार की है जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए इस फर्जीवाड़े की जांच की जाएगी।
 
पांच कर्मचारी हुए थे सस्पेंड
 
मामले में दोषी पाए गए पीजी परीक्षा शाखा के पांच कर्मचारियों को विवि प्रशासन ने निलंबित कर दिया था, लेकिन दूसरे कर्मचारियों के इनके पक्ष में उतरने से प्रशासन को झुकना पड़ा जिसके बाद इन सभी को बहाल कर दिया गया। प्रशासन ने फर्जीवाड़े की बात तो मानी लेकिन कार्रवाई करने में हाथ खड़े कर दिए।
 
एबीवीपी पर लगा था मिलीभगत का आरोप
 
एससीए के अनुसार जो छात्र पास किए गए वे सभी एबीवीपी के कार्यकर्ता हैं। इनमें एक एबीवीपी का कैंपस सचिव है, जबकि दूसरा एमटीए विभाग का डीआर है। एससीए अध्यक्ष राहुल चौहान के अनुसार बाकी छात्र भी एबीवीपी के कार्यकर्ता हैं।
 
> परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर सामने आए मामले को सरकार के पास भेजा है। सरकार की मंजूरी मिलते के बाद ही केस दर्ज कर जांच शुरू की जाएगी।
-अशोक कुमार शर्मा, आईजी विजिलेंस
  
आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
4 + 8

 
विज्ञापन
 
Ethical voting

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

स्पोर्ट्स

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment