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सरकार ने कब्जे में ली बाबा रामदेव की जमीन, भारी पुलिसबल तैनात

प्रेम कश्यप | Feb 23, 2013, 02:44AM IST
सरकार ने कब्जे में ली बाबा रामदेव की जमीन, भारी पुलिसबल तैनात
चायल। सोलन जिला के साधुपुल में योगगुरु बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ की विवादित संपत्ति को प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को अपने अधीन ले लिया। इस जमीन की लीज सरकार पहले ही रद्द कर चुकी है। संपत्ति का कब्जा लेने के बाद यहां पुलिस तैनात कर दी गई है। 
 
शुक्रवार सुबह 10.45 बजे कंडाघाट के थाना प्रभारी युसुफ अली के नेतृत्व में पुलिस विवादित स्थल के पास पहुंची। दोपहर 12.00 बजे जुनगा, सोलन व परवाणू से पुलिसकर्मियों की पांच बसें साधुपुल पहुंचीं। इसमें 200महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं।
 
एसडीएम कंडाघाट एलआर वर्मा ने 3.50 बजे संपत्ति पर कब्जा लेने की जानकारी दी। उन्होंने समिति के संयोजक रामेश्वर शर्मा को इससे संबंधित पत्र सौंप दिया। 
 
समर्थकों ने किया विरोध 
 
स्थानीय लोगों और बाबा रामदेव के समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध भी किया। लोगों को पीछे हटाते हुए पुलिस की 10 गाड़ियां परिसर में दाखिल हुईं। तहसीलदार प्रेम सिंह दौलटा ने कब्जे की प्रक्रिया को पूरा किया। एसडीएम एलआर वर्मा ने बताया कि सारी प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही।
 
बालकृष्ण बोले- प्रदर्शन नहीं करेंगे, कोर्ट जाएंगे
 
पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण ने सरकार की इस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा,‘ यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हम कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। हमें कानून पर भरोसा है और हम अदालत जाएंगे। न्यायालय में हमें इंसाफ मिलेगा।’ 
 
27 को प्रस्तावित है उद्घाटन
 
साधुपुल स्थित योगपीठ के उद्घाटन का कार्यक्रम 27 फरवरी को प्रस्तावित है। समिति का कहना है कि उन्होंने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। उद्घाटन तय समय पर ही होगा। इसमें रामदेव भी शामिल होंगे।
 
अब सरकारी प्रॉपर्टी है कहलोग की जमीन: कौल
 
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि कब्जे के बाद कहलोग की जमीन सरकार की हो गई है। पतंजलि योगपीठ के पदाधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई। लीज अवैध थी और सरकार ने नियमानुसार ही कार्रवाई की है। पतंजलि योगपीठ को अब दावा छोड़ देना चाहिए।
 
क्या है लीज विवाद
 
साधुपुल में पूर्व भाजपा सरकार की ओर से बाबा रामदेव को दी गई ९६.८ बीघा जमीन की लीज कांग्रेस सरकार ने रद्द कर दी थी। पूर्व भाजपा सरकार ने यह जमीन २क्१क् में ९९ साल के लिए रामदेव को लीज दी थी। सरकार का तर्क है कि जमीन 1956 में पटियाला के महाराजा ने बच्चों के खेलकूद के लिए दान में दी थी। लीज नेपाली मूल के व्यक्ति के नाम है, जो अवैध है।
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