सोलना/ चायल। पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हमारी जमीन पर सरकार का कब्जा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इसके खिलाफ कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। हमें कानून पर भरोसा है और हम अदालत में जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि न्यायालय में उन्हें न्याय मिलेगा।
आचार्य ने कहा कि 27 फरवरी को प्रस्तावित उद्घाटन के कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। हम साधुपुल में उद्घाटन करने पहुंचेंगे। हमें नियमों के तहत जमीन मिली थी, सरकार इस तरह की कार्रवाई कर रही है तो वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि निर्माण पर लगभग 11 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। सरकार यदि इस जमीन को अपने कब्जे में ले रही है तो जितना खर्च पतंजलि योगपीठ का हुआ है उतना पैसा हमें दे दे।
पतंजलि योगपीठ की हिमाचल इकाई के प्रभारी लक्ष्मी शर्मा ने भी कहा कि पतंजलि योगपीठ पर सरकार के कब्जे के खिलाफ अदालत की शरण में जाएंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि प्रदेश में पतंजलि योग समिति का कोई भी सदस्य विरोध प्रदर्शन नहीं करेगा।
विकास पर फिरा पानी
प्रदेश सरकार द्वारा पतंजलि पर कब्जा किए जाने के बाद यहां के स्थानीय लोग मायूस दिखे। उन्होंने कहा कि शिमला व सोलन की सीमा पर स्थित इस क्षेत्र में योगपीठ के माध्यम से जो विकास होना था अब उस पर पानी फिर गया।
200 मीटर दूर रहे कामगार
लोगों ने यहां तैनात करीब 200 कामगारों के रहने की व्यवस्था और ठेकेदारों के सामान के रखरखाव की मांग प्रशासन के समक्ष रखी।
एसडीएम कंडाघाट और एसपी सोलन ने आश्वासन दिया कि स्थिति सामान्य होने पर ठेकेदारों को सामान उठाने दिया जाएगा। जो मजदूर है, उनके ठहरने की व्यवस्था कर दी जाएगी, लेकिन मजदूरों को 200 मीटर बाहर रहना पड़ेगा।
‘पीठ’ का सफर
2010
भाजपा सरकार ने जनवरी में 96 बीघा जमीन योगपीठ को लीज पर दी थी।
19
जून 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री धूमल ने किया था शिलान्यास।
19
कांग्रेस सरकार ने 19 फरवरी 2013 को लीज रद्द करने का फैसला किया।
2013
एसपी सोलन रमेश छाजटा और एसडीएम कंडाघाट एलआर वर्मा ने 22 फरवरी को साधुपुल जाकर योगपीठ को कब्जे में ले लिया।
सभी फोटो: आर एस ठाकुर
आगे की तस्वीरों में जानिए कैसे हुआ कब्जा और क्या कहते हैं लोग...