ऋग्वेद में जिक्र है कि, ऋषि वशिष्ठ ने भगवान रूद्र से प्रार्थना की कि वे अपनी अंदर की ऊर्जा को कम करें, ताकि महाविनाश से बचा जा सके। भगवान रूद्र ने मानव कल्याण के लिए अपनी ऊर्जा अंदर सोख ली।
यह घटना पार्वती और व्यास नदी के संगम पर हुई थी, इसलिए यहां भगवान शंकर का मंदिर बनाया गया और नाम रखा गया बिजलेश्वर महादेव, जिसे आज लोग बिजली महादेव कहते हैं।