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सरकार ने दे रखी है 70 लाख की वीआईपी सुरक्षा, दो की सुरक्षा में 150 से भी ज्यादा

अशोक चौहान | Feb 18, 2013, 03:28AM IST
सरकार ने दे रखी है 70 लाख की वीआईपी सुरक्षा, दो की सुरक्षा में 150 से भी ज्यादा
शिमला। सूबे में 20 वीआईपी की सुरक्षा पर हर महीने करीब 70 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। इनकी सुरक्षा के लिए 20 पीएसओ सहित करीब 240 जवान तैनात किए गए हैं। जवानों की तनख्वाह और इनकी सुरक्षा में लगी गाड़ियों का कुल खर्च हर महीने 70 लाख रुपए तक पहुंच जाता है।
 
इनमें 200 से अधिक जवान तो जेड सिक्योरिटी के तहत आने वाले मुख्यमंत्री, राज्यपाल, दलाईलामा और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा में लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री आवास ओकओवर में पुलिस और सीआईडी के करीब 20 लोग तैनात किए गए हैं। ये सभी तीन शिफ्ट में ड्यूटी देते हैं।  
 
इसके अलावा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निजी आवास हॉली लॉज में भी सीआईडी का एक हेड कॉन्स्टेबल, दो महिला कॉन्स्टेबल सहित पांच जवान तैनात किए गए हैं। इसके अलावा शिमला पुलिस ने भी यहां पर तीन से पांच जवान तैनात कर रखे हैं।  
 
दिल्ली के जंतर मंतर स्थित मुख्यमंत्री निवास पर भी पांच पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। सीएम के काफिले में उनके साथ एक पीएसओ और एस्कॉर्ट भी शामिल हैं। 40 जवान सिर्फ सीएम की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इनका कुल मासिक वेतन करीब 15 लाख रुपए बनता है।
 
दो पूर्व मुख्यमंत्रियों प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार को दो-दो पीएसओ मुहैया करवाए गए हैं। इन्हें एस्कॉर्ट भी दी जाती है। दोनों के साथ हर समय 12 जवान तैनात रहते हैं। सांसद अनुराग ठाकुर को भी प्रदेश सरकार ने एक पीएसओ मुहैया करवाया है। कई बार इनके निजी आवास पर भी कुछ जवानों की तैनाती करनी पड़ती है।
 
पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान 50 विधायकों ने निजी सुरक्षा अधिकारी लिए थे। इस सरकार में अभी किसी विधायक को सीआईडी की ओर से पीएसओ नहीं मिले हैं।
 
कुछ विधायकों ने आवेदन किया है लेकिन अभी इन पर विचार चल रहा है। किसी भी विधायक को पीएसओ लेने के लिए जिला पुलिस या सीआईडी के पास आवेदन करना पड़ता है। 
 
दलाईलामा के साथ बटालियन की कंपनी
 
धर्मशाला में दलाईलामा की सुरक्षा के लिए जेड सिक्योरिटी के तहत बटालियन की एक कंपनी को तैनात किया गया है। करीब 100 जवान यहां शिफ्ट में ड्यूटी देते हैं। ये सभी सेकंड बटालियन से यहां तैनात किए जाते हैं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस के कुछ जवान भी यहां लगाए गए हैं। इसमें एडिशनल एसपी स्तर का अधिकारी मुखिया रहता है।
 
आठ मंत्रियों समेत 13 वीआईपी को पीएसओ
 
आवासों पर भी जवान
 
सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार सभी आठ मंत्रियों को सीआईडी की ओर से एक-एक पीएसओ दिया गया है। इनमें आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स, स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह, परिवहन मंत्री जीएस बाली, ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया, वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री, अर्बन डवलपमेंट मंत्री सुधीर शर्मा, आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी, समाज न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल को पीएसओ दिया है।
 
इनके निजी आवास पर भी जवानों की तैनाती रहती है। तीन सीपीएस विनय कुमार, राजेश धर्माणी और नीरज भारती को भी एक-एक पीएसओ दिया गया है। पुलिस महानिदेशक आईडी भंडारी और मुख्य सचिव के पास भी निजी सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं।
 
आईपीएस ऑफिसर नलिन प्रभात को जेड सुरक्षा
 
सीआरपीएफ में बतौर आईजी तैनात आईपीएस नलिन प्रभात को भी प्रदेश सरकार ने जेड सिक्योरिटी के तहत सुरक्षा मुहैया करवाई है। आईजी नलिन प्रभात का कुल्लू में निवास है और जब भी वे छुट्टियों में आते हैं तो उनके और परिवार की सुरक्षा के लिए यहां सीआईडी की ओर से सात से दस जवान तैनात किए जाते हैं।
 
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चलाए गए सीआरपीएफ मिशन में इनकी अहम भूमिका रही थी जिसके बाद केंद्र के कहने पर प्रदेश सरकार इनके लिए सुरक्षा के इंतजाम करती है।
 
एस्कॉर्ट, पुलिस पायलट पर 8 से 10 लाख खर्च
 
सीएम, राज्यपाल, दलाईलामा और दो पूर्व मुख्यमंत्री को एस्कॉर्ट देने के लिए पांच गाड़ियां भी दी गई हैं। सीएम, गर्वनर और दलाईलामा को पुलिस पायलट के तौर पर भी तीन गाड़ियां लगाई गई हैं। एस्कॉर्ट, पायलट में चलने वाली गाड़ियों का कुल खर्च करीब 8 से 10 लाख रुपए पहुंच जाता है।
 
क्या है एस्कॉर्ट
 
जेड सिक्योरिटी के तहत कुछ लोगों के साथ एस्कॉर्ट भी दी गई है। इसमें एक कांस्टेबल चालक, एक ग्रेड वन स्तर का एनजीओ, एक एएसआई या हेडकांस्टेबल और एक कांस्टेबल शामिल होता है। वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा में इनकी भूमिका सबसे अहम होती है।
 
इनको कोई पूछने वाला नहीं
 
जिलों में लगाए गए कई डीएसपी स्तर के अधिकारियों ने भी अपने साथ पीएसओ ले रखे हैं। जिला शिमला के एसपी ऑफिस में तो रिसेप्शन पर भी हर समय दो पीएसओ मौजूद रहते हैं। फील्ड में देखें तो महकमा जवानों की कमी की बात करता है।
 
राज्यपाल को जेड सिक्योरिटी
 
दूसरे राज्यों की तरह प्रदेश में भी राज्यपाल को जेड सिक्योरिटी मिली हुई है। राज्यपाल के साथ एक पीएसओ और एक एस्कॉर्ट हमेशा तैनात रहते हैं। इसके अलावा राजभवन में 30 से 35 जवान तैनात रहते हैं जो तीन शिफ्ट में ड्यूटी देते हैं।
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