दादा की जवानी और दादी दिलबर जानी
एक दिन दादाजी को याद आयी अपनी जवानी
दादी से बोले ऐ मेरे दिलबर जानी
कल हम पुराने दिनों की तरह जियेंगे
गुलाब लेकर तुम्हारा नदिया के किनारे इंतज़ार करेंगे
अगले दिन दादा जी ने शाम तक किया इंतजार
पर न आयी जश्न-ए-बहार
दादा जी झल्लाए -
तुम कैसी प्रेमिका हो,आयी नहीं
दिन भर इंतजार करके
मेरी घुटने का बज गया बाजा
दादी जी शरमाकर बोली -
‘क्या करूँ माँ ने आने नहीं दिया मेरे राजा'







