जार नम्बर 43
एक कस्बे में चमत्कारी डॉक्टर मशहूर था. वह किसी की कोई भी बीमारी का इलाज कर देता था. सभी लोग उससे हैरत में थे कि सब कैसे कर लेता है. सिर्फ बंता को यकीन नहीं था.
तो एक दिन बंता उस डॉक्टर के पास ये साबित करने गया कि वो कोई चमत्कारी नहीं है!
वह अंदर गया और डॉक्टर से कहा कि मैं अपनी जीभ से परेशान हूँ. मैं कुछ भी चखता हूँ, मुझे उसका स्वाद नहीं आता?
डॉक्टर अपने सिर को खुजलाने लगा, और अपने मुहं के अंदर बड़बड़ाने लगा इसे क्या दूँ? इसे क्या दूँ?
और एक दम से कहा तुम्हें 43 नम्बर के जार की जरुरत है, बंता हैरान होकर कहने लगा कि 43 नम्बर का जार?
तभी डॉक्टर कहीं बाहर गया और 5 मिनट बाद हाथ में एक डब्बा लाया और बंता को उसमें से कुछ निकाल के दिया बंता ने जैसे ही चखा वैसे ही थूक दिया!
छि: छि: ये तो टट्टी है! वो जोर से चिल्लाया...
डॉक्टर ने कहा मैंने तुम्हारी जीभ का स्वाद ठीक कर लिया है, तब बंता बहुत दुखी होकर अपने घर वापिस गया!
एक महीने बाद फिर से बंता एक नयी समस्या लेकर उसी डॉक्टर के पास आया और कहने लगा डॉक्टर साहब अब मुझे कुछ भी याद नहीं रहता है, मेरी स्मरण शक्ति कमजोर हो गयी है!
उसने फिर डॉक्टर को परेशानी में डाल दिया, डॉक्टर फिर सिर खुजलाने लगा और मुहं में बड़बड़ाने लगा! क्या करूँ? क्या करूँ? तब बंता से कहा, क्या तुम्हें जार नम्बर 43 याद है!
जैसे ही डॉक्टर के मुहं से बंता ने जार नंबर 43 सुना उसने आगे कुछ भी नहीं सुना और वहां से तुरंत भाग गया!








