पाकिस्तान
9 अक्टूबर, 2012 को मलाला यूसुफजई पर हुए हमले के कुछ महीनों बाद ही दुनिया भर से हजारों लोगों ने मलाला को ‘नोबल शांति पुरस्कार’ देने की मांग की। तालिबान ने इस 15 साल की लड़की को गोली मार दी थी, क्योंकि वह महिला शिक्षा के लिए आवाज उठा रही थी। इसका इलाज ब्रिटेन में किया गया था और वह बच गई। 2008 में ही तालिबान ने सिर्फ महिला शिक्षा को रोकने के लिए करीब 150 स्कूलों को तबाह कर दिया। मलाला पर हुआ यह हमला तो बस एक ही पक्ष को दिखाता है। इस देश में ऑनर किलिंग, जबरदस्ती शादी कराना, महिला तस्करी, रेप और एसिड से हमला काफी आम बात है। पाकिस्तान में 90 फीसदी से ज्यादा महिलाएं उनके परिवार के लोगों के द्वारा ही मानसिक रूप से प्रताड़ित की जाती हैं।