काहिरा. मिस्र में सेना की सत्ता विरोधी आंदोलन में शनिवार को जब एक महिला ने आवाज उठाई तो ज्यादती की इंतहा हो गई। महिला को करीब एक दर्जन सेना के जवानों ने बाल पकड़ कर घसीटा, कपड़े फाड़ डाले, चेहरे और शरीर पर लात-घूंसे व डंडे बरसाए।
इस बदसलूकी और बेरहमी के खिलाफ मिस्र की 10 हजार से अधिक महिलाओं ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिसवाले महिला को तब तक ठोकरें मारते रहे, जब तक वह बेहोश नहीं हो गई। उन जवानों के सरपरस्तों को शायद ये नहीं पता कि जिस्म पर दिए गए जख्मों का दर्द तत्काल तो जुबां बंद कर देते हैं, पर अंदर की आवाज और आत्मविश्वास कम नहीं होता।
अब उस महिला को दिए गए जख्म पूरे देश की आवाज बन रही है..एक बार फिर मिस्र में कौम की आवाज बुलंद हो रही है।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप था कि मिस्र की फौज जानबूझकर महिलाओं को अपना निशाना बना रही है ताकि उनके घरवाले डर के कारण विद्रोह ना करें। इससे पहले मिस्र की मिलिट्री ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं को अनैतिक करार दिया था। मार्च 2011 में विद्रोहियों को दबाने के लिए मिस्र सेना ने महिलाओं को आपत्तिजनक कौमार्य परीक्षण करवाने के लिए मजबूर किया था।
तस्वीरों में देखिए कैसे मिस्र की सड़कों पर उतरा महिला मोर्चा...