कश्मीर का सोपोर कस्बा सेब के बागों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यह यहां की अर्थव्यवस्था में बहुत मददगार है। सोपोर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर जेलम नदी बहती है और इसके पास गांव है शीर जागीर। हालांकि 2001 से पहले यह गांव बाकि दुनिया के लिए अंजान था। लेकिन आज इसकी अफजल गुरु के गांव के नाम की जाती है।
शीर जागीर में अफजल के दो मंजिला मकान पर ताला लगा हुआ है। उसका छोटा बेटा हिलाल अजमल कसाब की फांसी के बाद से इतना डर गया था कि वह कहीं चला गया है। बड़ा भाई एजाज अपने परिवार को लेकर कुछ साल पहले ही घर छोड़ कर जा चुका है। पत्नी तबस्सुम 2001 से अपने पिता के घर बारामूला में रहती है। गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि वह कभी-कभी यहां आती है।
बीते सितम्बर में अफजल की मां का निधन हो गया था। वह कई सालों से उनकी सेवा कर रहा था। उसके पिता हबीबुल्ला करीब 35 साल पहले गुजर गए थे। पड़ोसियों ने बताया कि उसने अपनी मां के साथ लंबे समय तक संघर्ष किया था। वह खुद खाना बनाना था और घर के सारे काम करता था। बावजूद इसके वह अपनी पढ़ाई को लेकर बहुत गंभीर था।
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