खतरे में है दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता का अस्तित्व!

किसी 4,500 साल पुराने घर में चहलकदमी करना बिल्कुल अनोखा अनुभव होगा और अगर वो चारदीवारी आपके आज के घर से मिलती जुलती हो तो बात ही अलग होगी। एक ऐसा घर, जिसमें आगे और पीछे दरवाजें हो, एक-दूसरे को जोड़ते कमरे हों और सुर्ख लाल ईंटों से बनी दीवारें हों।
हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे पुराने शहर मोहनजोदाड़ो की। 2600 ईसापूर्व बसाए गए इस खूबसूरत शहर को सुनियोजित तरीके से बनाया गया था। यहां की बेहतरीन वास्तुकला और व्यवस्थित सीवेज सिस्टम ने ही इस शहर को दुनिया के सबसे प्राचीन आधुनिक शहर की फेहरिस्त में शामिल किया है। ऐसा माना जाता है कि सिंधु नदी के किनारे बसी इस प्राचीन सभ्यता के शहर में करीब 35,000 घर थे।
यह दुर्भाग्य की बात है कि इस प्राचीन धरोहर की देख-रेख न होने के कारण इसके अवशेष खतरे में हैं। बीबीसी न्यूज के संवाददाता अलीम मकबूल ने मोहनजोदाड़ो का दौरा किया और वहां की खस्ताहाल हालत का जायजा लिया। अलीम ने देखा कि मोहनजोदाड़ो के उस हिस्से की दीवारों को काफी नुकसान पहुंचा हैं, जहां मध्यमवर्गीय लोग रहा करते थे।
अलीम के अनुसार पानी में मौजूद अम्लीय तत्वों की वजह से अवशेषों की दीवारों को काफी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने बताया शहर के ऊपरी हिस्से की हालत भी काफी खराब है, जहां अमीर लोग रहा करते थे। कुछ दीवारें पूरी तरह गिर चुकी हैं और कुछ कभी भी गिर सकती हैं।
मोहनजोदाड़ो की खस्ताहाल हालत के बारे में पुरातत्वविद असमा इब्राहिम का कहना है "बारिश और नमी के कारण इस प्राचीन शहर को बचाना काफी मुश्किल है। दूसरी ओर सरकार एवं संबंधित विभाग द्वारा इसे बचाने के जो प्रयास किए जा रहे हैं वो काफी कामचलाऊ हैं।"
दीवारों को बचाने के लिए मिट्टी के गारे का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि मिट्टी नमी और अम्लीय तत्वों को अवशोषित कर ले। इस विरासत के कई हिस्से ऐसे भी हैं, जहां पुरानी ईंटों की जगह नई ईंटें इस्तेमाल की जा रही हैं।
असमा इब्राहिम के अनुसार वर्ल्ड हेरीटेज साइट होने के बावजूद सरकार की अनदेखी और सुरक्षा में कमी के चलते यहां कम ही पर्यटक आते हैं। असमा ने कहा कि मोहनजोदाड़ो को बचाने के लिए हमें जल्द ही कई विशेषज्ञों की ज़रूरत है।








