बीजिंग.चीन की एक अदालत ने कंबोडिया से भेजे गए दो उइघर मुसलमानों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है तथा कुछ अन्य लोगों को 17 वर्ष की सजा सुनाई है।
जिन लोगों को 17 वर्ष की सजा सुनाई गई है उनके बारे में विस्तार से जानकारी नही मिली है क्योंकि अदालत की सुनवाई गोपनीय रूप से हुई।
यह जानकारी रेडियो प्री एशिया ने शुक्रवार को दी है। रेडियो और आनलाइन खबरों में स्थानीय अधिकारियों और सजा प्राप्त लोगों के परिजनों के हवाले से जानकारी दी गई है। परिजनों ने बताया कि उन्हें जेल से नोटिस मिले हैं। यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है यह सजा कब दी गई है या उन पर क्या आरोप लगाए गए हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि इन लोगों को 2009 में शिन्जियांग उइघर स्वायत्त क्षेत्न में उइघर बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक हान चीनियों के बीच भड़के दंगे के मामले में यह सजा सुनाई गई है। यह सजा ऐसे समय में सुनाई गई है जब इसी हफ्ते सिचुआन प्रांत में पुलिस और स्थानीय तिब्बियों के बीच संघर्ष हुआ है जिसमें तीन तिब्बती मारे गए थे तथा कई घायल हुए थे।
मानवाधिकार संगठनों ने कंबोडिया से शरण मांगने गए लोगों को चीन को सौपने के लिए उसकी आलोचना की। कंबोडिया द्वारा दिसंबर 2009 में उइघरों को चीन को सौपने के बाद चीन ने उसके साथ 85 करोड़ डालर के 14 करारों पर हस्ताक्षर किए थे।
शिन्जियांग की राजधानी उरूम्की में जुलाई 2009 के दंगों के बाद करीब 20 उइघरों ने कंबोडिया में शरण मांगी थी। आजीवन कारावास की सजा प्राप्त दोनों इन्हीं उइघरों में शामिल थे।
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