शिकागो. 26/11 के मुंबई आतंकी हमले की साजिश में शामिल रहे डेविड कोलमैन हेडली को शिकागो की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 35 साल जेल की सजा सुनाई है। अमेरिकी सरकार ने हेडली के लिए इतनी ही सजा की मांग की थी। जांच में सहयोग के चलते वह उम्रकैद और मौत की सजा से बच गया।
हेडली को मुंबई हमले की साजिश के अलावा डेनमार्क के अखबार पर हमले की साजिश रचने के लिए भी सजा सुनाई गई है। सजा सुनाते समय कोर्ट परिसर खचाखच भरा था। इसलिए कार्यवाही देरी से शुरू हुई।
ऐसे बचा मौत की सजा से
सुनवाई के दौरान हेडली ने 12 आरोप कबूले हैं। हेडली ने मौत की सजा से बचने के लिए याचिका दायर की थी। इसमें उसने तर्क दिया था कि उसने पूछताछ में अधिकारियों का सहयोग किया और मामले से जुड़ी कई अहम जानकारियां दीं। मौत की सजा न मिलने पर कोर्ट में मौजूद लोगों को भी हैरानी हुई। यहां तक कि सजा सुनाने वाले जज ने भी इसे नाकाफी बताया। उसे सजा देते हुए दुखी शिकागो के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज हैरी डी लिनेनवेबर ने कहा, 'उसने अपराध किया, इसमें सहयोग किया और इस सहयोग के लिए उसे ईनाम दिया गया। मैं चाहे जो भी फैसला सुनाऊं इससे आतंकवादी नहीं रुकेंगे। दुर्भाग्य की बात है कि आतंकवादी इसकी परवाह नहीं करते। मुझे हेडली की इस बात पर भरोसा नहीं होता जब यह कहता है कि वह अब बदल गया है। हेडली से जनता को बचाना और वह किसी दूसरी आंतकवादी कार्रवाई में शामिल न हो, यह सुनिश्चित करना मेरी जिम्मदारी है। 35 साल जेल की सजा उचित नहीं है। पर सरकार ने इतनी ही सिफारिश की है। इसलिए मैं इस प्रस्ताव को स्वीकार करूंगा। वह फांसी के लायक है। लेकिन सरकार की तरफ से इतनी ही मांग की गई है। सरकार को जांच में हेडली ने हर संभव सहयोग किया है।'
बताया जा रहा है कि अमेरिका ने हेडली को भारत को नहीं सौंपने और मृत्युदंड नहीं देने का आश्वासन दिया है। हालांकि भारत और अमेरिका, दोनों ही मुल्कों में इस बारे में साफ-साफ कुछ नहीं कहा जा रहा है। हेडली को सजा सुनाए जाने के बाद दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि हेडली के प्रत्यर्पण पर काम चल रहा है और इस बारे में कोई कयास लगाना ठीक नहीं होगा।
25 जनवरी 2013 की खास खबरें