बीजिंग. चीन और जापान के बीच पूर्वी चीन सागर के विवादित द्वीपों को लेकर बढ़ता तनाव तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता है। दोनों देशों के बीच 1937 से लेकर 1945 तक हुआ युद्ध ही बाद में जाकर 'दूसरा विश्व युद्ध' बना था। इससे पहले जापान और चीन के बीच 1894 से 1895 तक भी युद्ध हो चुका है। अब दोनों देश अपने और दुनिया के तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। मौजूदा समय में झगड़े की जड़ पूर्वी चीन सागर की द्वीप श्रंखला है जिसे चीन में दियोऊ और जापान में सेनकाकू कहा जाता है। जापान ने 20वीं सदी के मध्य में कई दशक तक चीन के कई हिस्सों पर कब्जा किया हुआ था जो अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद चीन के विरोध के बावजूद जापान को दे दिए थे।
इस समय दोनों देशों ने विवादित द्वीप श्रंखला के पास अपनी समुद्री गश्त बढ़ा दी है। हाल ही में अमेरिका के इन्हीं विवादित द्वीपों पर जापान का अधिकार होने संबंधी हालिया बयान ने चीन का गुस्सा और भड़का दिया है। हालांकि चीन हमेशा से अमेरिका को अपने मामलों से दूर रहने की नसीहत देता आया है लेकिन इस बयान ने आग में घी का डालने का काम किया है। ऐसे माहौल में पांच कारण हैं जो पूर्वी एशिया की इन दो महाशक्तियों के बीच युद्ध की वजह बन सकते हैं (विस्तार से पढ़ने के लिए आगे के स्लाइड्स पर क्लिक करें)।
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