Home » International News » Bhaskar Gyan » For Crying Out Loud: Study Backs Baby Sleep Strategies

मीठी नींद के लिए सोते समय बच्चों को रोने से न रोकें

Agency | Jan 05, 2013, 10:41AM IST
मीठी नींद के लिए सोते समय बच्चों को रोने से न रोकें
न्यूयॉर्क. जो माता पिता अपने बच्चों के रोते ही उन्हें बहलाकर चुप कराने के लिए परेशान होते हैं उनके लिए यह अच्छी खबर है। अगर वे अपनी यह आदत छोड़ दें तो उनके बच्चे मीठी नींद सो सकेंगे। 
 
 
फिलाडेल्फिया विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर मार्शा वेनरॉब के नेतृत्व में मनोवैज्ञानिकों के दल ने एक अध्ययन में यह खुलासा किया है। इन्होंने 1200 बच्चों पर करीब तीन साल तक यह अध्ययन किया।  अध्ययन से पता चला है कि अगर बच्चों को सोते समय रोने से न रोका जाए तो वे धीरे-धीरे खुद शांति से सोने के आदी हो जाते हैं। उन्हें बहलाने की जरूरत नहीं पड़ती। रो रोकर सोने वाले बच्चे रात में कभी- कभार ही उठते हैं। 
 
 
अध्ययन में शामिल अधिकतर बच्चे छह महीने तक सप्ताह में पांच से छह रात सोते रहते थे जबकि एक तिहाई बच्चे रात में अक्सर कुनमुनाते रहते थे या जाग जाते थे। रात में जागने वाले अधिकतर लड़के थे। इन बच्चों को रात में मां का दूध पीने की भी आदत थी।
 
 
सुझाव
 
> बच्चों को रात में एक निश्चित समय पर सोने के लिए बिस्तर पर छोड़ देना चाहिए। इससे वे खुद सोने के आदी हो जाएंगे।
 
> बच्चे के नींद से जागने और रोने पर माता-पिता को तुरंत उसे बहलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
 
 
निष्कर्ष
 
> अगर कोई मां रात में बच्चे के जागने पर जाग जाती है या बच्चा मां का दूध पीते समय सो जाता है तो इसका मतलब यह है कि बच्चे को मीठी नींद नहीं आ रही है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक है।
 
> रात को जागने के आदी बच्चों के माता-पिता और रिश्तेदार भी मनोवैज्ञानिक तौर पर प्रभावित होते हैं और बच्चे भी चिड़चिड़े हो जाते हैं।
आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
2 + 4

 
विज्ञापन

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

स्पोर्ट्स

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment