इस्लामाबाद.पाकिस्तान के प्रधानमंत्नी यूसुफ रजा गिलानी ने उनके खिलाफ अवमानना के मामले में आरोपपत्न दायर करने के लिए 13 फरवरी को उन्हें समन करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की दी है।
गिलानी के वकील ऐतजाज अहसान ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्नी ने अपनी अपील में न्यायालय से आग्रह किया है कि विवादास्पद राष्ट्रीय सौहाद्र अध्यादेश को लागू करके राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा शुरू न करने के लिए उनके खिलाफ दिए गए अवमानना के नोटिस तथा दो फरवरी को अपने आदेश को वह वापस ले ले।
अहसान ने 200 से ज्यादा पृष्ठों की अपील में 54 कानूनी सवाल उठाए हैं। अहसान दो फरवरी को मामले की सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत को यह समझाने में नाकाम साबित हुए थे कि संविधान के अनुच्छेद 248 के तहत राष्ट्रपति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं शुरू की जाती सकती। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को विशेष छूट हासिल है। इसके बाद अदालत ने गिलानी के खिलाफ अवमानना का मामला औपचारिक रूप से दर्ज करने के लिए उन्हें 13 फरवरी को अदालत में खुद पेश होने का समन जारी किया था।
अदालत के इस फैसले के बाद अहसान ने बाहर खड़े संवाददाताओं से कहा कि वह अपने मुव्वकिल को अपील दायर करने का सुझाव देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गिलानी के खिलाफ अदालत के आदेश को लागू करने से इंकार करने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के पर्याप्त आधार हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि यदि गिलानी के खिलाफ ये आरोप साबित हो जाते हैं कि उन्हें छह माह की जेल की सजा और प्रधानमंत्नी पद से बर्खास्त किया जा सकता है। यदि उन्हें सजा हो गई तो राष्ट्रपति ही उन्हें माफी दे सकते हैं लेकिन उनका दोषसिद्ध रिकार्ड में मौजूद रहेगा और वह पांच वर्षो तक प्रधानमंत्नी पद ग्रहण करने के लिए अयोग्य रहेंगे।
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