इस्लामाबाद/लाहौर.पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने न्यायपालिका के साथ किसी तरह का टकराव नहीं करने पर जोर देते हुए कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सम्मान करेंगे।
गिलानी का यह ताजा बयान शुक्रवार को उस वक्त आया है, जब खबर आई कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व ने सुप्रीम कोर्ट के कदम को चुनौती देने का फैसला किया है।
लाहौर में यह पूछे जाने पर कि अदालती अवमानना के मामले में दोषी करार दिए जाने की आशंका को देखते हुए वह क्या महसूस कर रहे हैं,तो गिलानी ने कहा,‘मैं अदालत के फैसले का सम्मान करूंगा। यह मामला अदालत में है और मेरे वकील इस पर बोलेंगे।’
गिलानी ने जोर दिया कि उनकी सरकार न्यायपालिका और किसी भी सरकारी संस्था के साथ न तो अतीत में टकराव चाहती थी और न ही भविष्य में ऐसा चाहती है। माना जा रहा है कि उनके वकील एतजाज अहसन अगले कुछ दिनों में न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेंगे। न्यायालय ने गिलानी को अवमानना का आरोपी बनाने के लिए 13 फरवरी को सम्मन किया है।
टकराव के मूड में नहीं सरकार
सीनेट की 54 सीटों के लिए दो मार्च को चुनाव होने हैं। रिश्वत के मामलों को फिर से खोलने के मुद्दे पर पीपीपी के सहयोगी दल टकराव के मूड में नहीं हैं। कुछ सहयोगी दलों ने सुझाव दिया है कि सरकार को न्यायपालिका से टकराव नहीं लेना चाहिए और तनाव को कम करने के लिए स्विस प्रशासन को पत्र लिख देना चाहिए। लेकिन पीपीपी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि ऐसा करना ‘राजनीतिक आत्महत्या’ होगा।
सुप्रीम कोर्ट के कदम को चुनौती देगी पीपीपी
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक न्यायपालिका से कोई टकराव मोल लिए बिना सत्तारूढ़ पीपीपी के शीर्ष नेतृत्व ने गिलानी के खिलाफ अदालती अवमानना के आरोप लगाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के कदम को चुनौती देने का फैसला किया है। समाचार पत्र ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार का इस संबंध में कोई भी कदम अगले महीने होने वाले संसदीय चुनाव पर निर्भर करता है।
सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सीनेट के लिए होने वाले चुनाव पर किसी चीज का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक पीपीपी के शीर्ष नेतृत्व ने अपने कार्यकर्ताओं को सलाह दी है कि वे न्यायपालिका के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी न करें।
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