आर्थिक संकट में भारत-चीन से उम्मीद
Source: एजेंसी | Last Updated 12:50(30/01/12)
दावोस. विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में भारत सहित दुनिया भर से जुटे दिग्गज उद्यमियों और निवेशकों ने रोजगार, आर्थिक विषमता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को 2012 की विश्व अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया है। पांच दिन का यह सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ।
इस सम्मेलन की शुरुआत यूरो संकट और आर्थिक मंदी के वैश्विक असर पर चर्चा से हुई थी। इस चर्चा में एशिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं- भारत और चीन के प्रदर्शन को आशा की किरण माना गया। सम्मेलन का निष्कर्ष मुख्य रूप से यही निकाला गया कि सभी देश की सरकारों और कंपनियों को कंधे-से-कंधा मिलाकर इस कठिन दौर से निपटना होगा ताकि रोजगार बढ़ाया जा सके।
रोजगार सृजन के लिए नई प्रौद्योगिकी सहित सभी प्रकार के संसाधनों को जोड़ने पर बल दिया गया। समापन के दिन सिटी ग्रुप के मुख्य कार्यकारी विक्रम पंडित,यूनीलिवर के पॉल पोलमैन, शेल प्रमुख पीटर वोजर तथा फेसबुक की मुख्य परिचालन अधिकारी शेरिल सैंडबर्ग ने अपनी बात रखी।
आंतरिक मांग के बूते बाहरी खतरे से बचा भारत
भारत के बारे में आर्थिक मंच पर कहा गया कि देश की अर्थव्यवस्था ने आंतरिक मांग के बलबूते बाहर की चुनौतियों के बीच भी अपने को बचाये रखा है पर देश के सामने निवेश का प्रवाह बनाये रखने की चुनौती है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स के अध्यक्ष डगलर एल पीटरसन ने कहा कि भारत के सामने विकास की चुनौती जरूर है लेकिन निवेश के लिए उसकी साख बेहतर होने की संभावना है। बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा, उनके सहयोगी राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार तथा सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री सचिन पायलट ने किया।
सोशल साइट्स की प्रशंसा
डब्ल्यूईएफ सम्मेलन के दौरान अरब देशों में जन आंदोलन में फेसबुक, ट्विटर और गूगल जैसी सोशल नेटवर्किग साइट्स की ‘संदेशवाहक’ की भूमिकाओं की प्रशंसा की गई। वहीं इंटरनेट जैसे उन्मुक्त माध्यम पर सरकारों के नियंत्रण और निजता के अधिकार की रक्षा जैसे मामलों पर भी जोरदार चर्चा हुई।
बताया जाता है कि वाल स्ट्रीट और लंदन जैसे वित्त बाजारों के घेराव जैसे मुद्दे भी यहां चर्चा हुई। इंटरनेट पर नियंत्रण को लेकर तीखी बहस में सोशल नेटवर्किग कंपनियों के मुख्य कार्यकारियों ने ‘मक्खी के साथ दूध फेंकने’ की बजाए संतुलित नजरिया अख्तियार करने पर जोर दिया। इसी संदर्भ में रोजमर्रा की उपभोक्ता सामग्री बनाने वाली वैश्विक कंपनी यूनीलिवर के पालमैन ने कहा,‘कोई सरकार यदि इन नेटवर्किग साइट्स को प्रतिबंधित करती है तो यह उसके लिए मूर्खता होगी। पर उन्होंने निजता के सवाल को सही बताया और कहा कि इंटरनेट के कारण निजता में घुसपैठ का खतरा पैदा जरूर हुआ है।
हमें अगले दस साल में 60 करोड़ रोजगार के नए अवसर सृजित करने होंगे। इनमें 20 करोड़ तो तुरंत चाहिए।’
विक्रम पंडित,सिटी ग्रुप के प्रमुख
इंटरनेट क्षेत्र में रोजगार बढ़ रहे हैं। फेसबुक और अन्य दूसरी नेटवर्क कंपनियों ने 2011 में 2,30,000 नए रोजगार दिये।
शेरिल सैंडबर्ग,फेसबुक अधिकारी