मालदीव के स्थानीय समाचार चैनलों पर मोबाइल से खींचा गया एक वीडियो लगातार दिखाया जा रहा है। इस वीडियो में सुरक्षाकर्मी पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को एक दुकान से जबरन बाहर खींचते और अपने साथ ले जाते देखे जा सकते हैं।
इस बीच मालदीव में मोहम्मद नशीद के राष्ट्रपति पद से अपदस्थ होने के बाद संकट गहराता जा रहा है। मालदीव की एक अदालत ने जहां नशीद की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं, वहीं उनके परिवार ने श्रीलंका से शरण मांगी है।
मालदीव की आपराधिक अदालत ने गुरुवार को नशीद तथा पूर्व रक्षा मंत्री थोलहाथ इब्राहिम कालेफानु की गिरफ्तारी के आदेश दिए। अदालत का यह आदेश नशीद के अपदस्थ होने के एक दिन बाद बुधवार को हजारों समर्थकों के साथ राजधानी माले में रैली निकाले जाने के बाद आया है।
इस बीच, पूरे घटनाक्रम के लिए पूर्व शासक अब्दुल गयूम को जिम्मेदार ठहराते हुए नशीद ने कहा, "करीब 200 पुलिस कर्मियों और सेना के 80 अधिकारियों ने सत्ता परिवर्तन में मदद की। पुलिस और सेना बर्बर तरीके से पेश आई। उन्होंने मुझे बुरी तरह पीटा। हमलोग अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद डरे हुए हैं।"
उन्होंने कहा, "मालदीव इस वक्त गम्भीर हालात के दौर से गुजर रहा है। मैंने कभी लड़ाई नहीं की और युद्ध नहीं चाहता। यदि पुलिस वारंट लेकर आती है, हम उनके साथ जाएंगे।"
मालदीव में फैली अस्थिरता के मद्देनजर नशीद का परिवार देश छोड़कर चला गया है और उसने श्रीलंका से पनाह मांगी है। नशीद की पत्नी लैला अली बुधवार रात श्रीलंका पहुंचीं और इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से फोन पर बात की। बाद में राजपक्षे ने मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद को फोन कर नशीद की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा।
वहीद ने राजपक्षे को आश्वस्त किया कि नशीद को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। लेकिन नई दिल्ली स्थित मालदीव उच्चायोग में वहां के उच्चायुक्त अब्दुल अजीज यूसुफ ने गुरुवार को कहा कि उन्हें पूर्व राष्ट्रपति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।