'यू स्टूपिड ये तुमने क्या किया. मेरी गुड़िया तोड़ दी.... हां मैंने तोड़ दी क्या कर लोगी. और अगले ही पल लड़की ने लड़के के हाथ को मुंह में चबा लिया. लड़का अब दर्द से कराह रहा है. अब लड़के की बारी है उसने अपनी गुस्से को नथूने में भरकर गर्म सांस ली और दोनों हाथों से लड़की के बाल पकड़ लिए. लड़की चीख रही है, लेकिन लड़के के चेहरे पर कोई शिकन नहीं है. ऐसा क्यों. लड़के ऐसे ही होते हैं. क्या यह झगड़ा सदियों से ऐसे ही चलता आ रहा है.
औरत और मर्द एक-दूसरे के बारे में सबकुछ जानकर भी एक-दूसरे के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं। 1992 में जॉन ग्रे की किताब (Men Are from Mars, Women Are from Venus) ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. इसमें बताया गया था कि धरती पर पुरुष मंगल ग्रह से आया था, जबकि शुक्र ग्रह से महिला का आगमन हुआ था। इसमें कितना सच है यह कोई नहीं जानता.
फिर भी यह बात तय है कि पुरुष और महिला में काफी अंतर होता है। भले ही महिलाएं इस बात को मुद्दा बनाएं। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक महिला और पुरुषों की प्रतिद्वंद्वता कई फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन इस बात का फैसला कभी नहीं हो पाया, कौन किससे ज्यादा बेहतर है।
रॉस्टर यूनीवर्सिटी के नए शोध में पता चला है कि औरत-मर्द को मनोवैज्ञानिक रूप से अलग कर पाना बहुत मुश्किल है। स्त्री और पुरुष एक ही खेत की मूली जैसे हैं और उनमें जरा भी भेद नहीं किया जा सकता है.
dainikbhaskar.com अपने पाठकों औरत-मर्द से जुड़ी कुछ वैज्ञानिक बातों को साझा कर रहा है, जिसमें कभी आपको अपने पर ही शक होगा कि आप औरत है या आदमी...