पाक में अब किसी के भी फोन या ईमेल की हो सकेगी जासूसी

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अब खुफिया विभाग किसी के भी फोन और ईमेल की निगरानी व जांच कर सकेगा। इनमें फोन टैप करना, इलेक्ट्रॉनिक डॉटा हासिल करना और ईमेल में ताका-झांकी भी शामिल है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस आशय के विवादास्पद विधेयक पर दस्तखत कर उसे कानून का रूप दे दिया।
राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। यह कानून निष्पक्ष जांच के लिए सुनवाई के नाम पर बना है। संसद के निचले सदन ने कई संशोधनों के बाद इसे पिछले साल दिसंबर में मंजूरी दी थी। सीनेट ने इसी महीने मंजूरी दी। इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक तौर तरीकों और उपकरणों से सबूत जुटाना है।
कोर्ट को मानने पड़ेंगे सबूत:
कानून मंत्री फारूक नाइक ने कहा कि पूरी कानून प्रणाली में सबूत जमा करने में एकरूपता रहेगी। फोन, ईमेल या अन्य संचार माध्यमों के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा एकत्र सबूत कोर्ट में सही माने जाएंगे। अदालतों को ये सबूत मानने
होंगे भले ही ये घटना से पहले जमा किए गए हों।
खतरा:
इस कानून का पाकिस्तान में कड़ा विरोध भी हो रहा है। इसे निजी और सिविल आजादी के लिए खतरा बताया गया है।
आश्वासन:
प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ ने नेशनल असेंबली में आश्वासन दिया था कि इस कानून का आम आदमी के खिलाफ दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियां रोकना है।






