पाकिस्तान के कबायली इलाकों में अमेरिका के ड्रोन हमले अक्सर विवादों में रहे हैं। इन हमलों में आतंकियों के साथसाथ आम नागरिक भी मारे गए हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान ही नहीं, दुनिया के कई देश भी इस पर चिंता जता चुके हैं।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ ने हाल ही में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड ओलसन के साथ मुलाकात में कहा कि अमेरिका को अब आतंकवादियों के खात्मे के लिए ड्रोन का विकल्प ढूंढ़ना होगा। यह पहला मौका नहीं था, जब पाकिस्तान ने अमेरिका को ड्रोन हमले बंद करने के लिए कहा हो। पाकिस्तान और अमेरिका ड्रोन हमलों का आपस में कोई समाधान निकालने के लिए लंबे समय से बातचीन कर रहे हैं।
पाक का तर्क है कि आतंकवादियों के खात्मे के लिए अमेरिका द्वारा पाक में किए जा रहे ड्रोन हमलों में आतंकियों के साथ आम आदमी भी मर रहे हैं। वहीं, अमेरिका ड्रोन को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रमुख हथियार मानता है। पाक के अलावा संयुक्त राष्ट्र भी ड्रोन हमलों पर चिंता जता चुका है। इससे पहले इसी साल जून में संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार उच्चयुक्त नवी पिल्लई ने कहा था कि पाकिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
नवी ने कहा कि इन हमलों के पीछे कोई पारदर्शी सैन्य ढांचा नहीं होता है। यही नहीं, स्वयं अमेरिकी रिपोर्ट में भी कहा गया है कि ड्रोन हमलों के कारण पाकिस्तानी चौबीसों घंटे दहशत में रहते हैं। अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क स्कूल ऑफ लॉ की ओर से जारी एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि ड्रोन उन्हें भी अपना निशाना बना रहे हैं, जो हमलों में घायल लोगों की मदद के लिए जाते हैं।
अंदर की स्लाइड में जानें ड्रोन का क्यों हो रहा है विरोध...