इस्लामाबाद. पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़े तेवर दिखाए। अदालत ने एक ओर जहां पीएम गिलानी की याचिका खारिज करते हुए 13 फरवरी को पेश होने का हुक्म दिया वहीं आईएसआई और सेना को भी जमकर फटकार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने अदियाला जेल के ‘अगवा’ किए गए सात कैदियों को अदालत में हर कीमत पर हाजिर करने का फरमान सुनाया। अदालत ने कहा कि इन कैदियों को चाहे स्ट्रेचर पर लाद कर ही क्यों न लाना पड़े, अदालत में हर हाल में पेश करना होगा। कोर्ट ने कहा कि आईएसआई और मिलिट्री इंटेलिजेंस को भले ही हेलीकॉप्टर क्यों न किराए पर लेना पड़े लेकिन इन कैदियों को हर हाल में पेश होना चाहिए।
चीफ जस्टिस ने आईएसआई और एमआई की ओर से पेश किए गए मेडिकल सर्टिफिकेट को भी नकार दिया जिसमें दिखाया गया था कि ‘अगवा’ कैदियों की हालत बेहद नाजुक है। चीफ जस्टिस ने आईएसआई और एमआई को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पीएम गिलानी कोर्ट में पेश हो सकते हैं तो अन्य लोगों को भी ऐसा करना चाहिए। कोर्ट ने आईएसआई और एमआई के खिलाफ आर्टिकल 9 के तहत कार्यवाही शुरू करने की भी चेतावनी दी।
आईएसआई और एमआई की ओर से कोर्ट में अपनी बात रख रहे वकील रजा इरशाद कयानी सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से बेहद निराश दिखे। चीफ जस्टिस ने वकील से उन लोगों के नाम बताने को कहा जो चारों कैदियों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं। वकील ने जब अपनी बात ऊंचे स्वर में कहने की कोशिश की तो चीफ जस्टिस ने उन्हें डांटते हुए चुप रहने को कहा।
पाकिस्तान में आईएसआई और एमआई द्वारा ‘अगवा’ किए गए 11 में चार कैदियों को यातनाएं देकर मार डाला गया और उनकी लाशें खुलेआम सड़कों पर फेंक दी गईं। सुप्रीम कोर्ट को भरोसा देने के बावजूद आईएसआई और एमआई अदियाला जेल के सातों कैदियों के खिलाफ आर्मी एक्ट के तहत भी मुकदमा चलाने में कामयाब नहीं हो सके।