बीजिंग. विवादित द्वीपों पर जापान के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनजर चीन के सशस्त्र बलों को 2013 में युद्ध लड़ने और जीतने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। चीनी सरकारी मीडिया ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपल्स डेली न्यूजपेपर के विदेशी संस्करण में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और चीन की पीपल्स आर्मड पुलिस फोर्स को युद्ध के लिए तैयार होने और इसे जीतने पर ध्यान देने को कहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक इन निर्देशों के दस्तावेज साल की शुरुआत में पीएलए के जनरल स्टाफ ने 2013 के सैन्य अभ्यास के बारे में जारी किए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि सशस्त्र बलों को तत्परता से असल युद्ध की तरह सैन्य अभ्यासों को अंजाम देने के साथ उच्च क्षमता युक्त सैनिकों को तैयार करने के प्रयास तेज करने चाहिए। हालांकि रिपोर्ट में पूर्वी चीन सागर में टोक्यो के साथ विवादित द्वीपों का जिक्र नहीं किया गया है जो जापान के अधीन हैं लेकिन चीन इन पर अपना दावा करता रहा है।
चीनी सरकारी मीडिया में पिछले साल जारी रिपोर्ट में सेना के लिए 2012 के लक्ष्यों में सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को नहीं कहा गया था। इसमें सेना से अभ्यास सुधारों को शामिल करने और सूचना तकनीक को अपनाने पर जोर दिया गया था।
चीन और जापान के बीच समुद्री विवाद कई सालों से घटता-बढ़ता रहा है लेकिन पिछले साल जापान सरकार के तीन द्वीपों को प्राइवेट मालिकों से खरीद कर राष्ट्रीयकृत करने के बाद चीन में इसका विरोध शुरू हो गया था। बीते हफ्तों में दोनों देशों के जेट फाइटर इस स्थान पर उड़ानें भरते रहे हैं लेकिन दोनों के बीच झड़पें नहीं हुई हैं।
जापान ने 20वीं सदी के मध्य में कई दशक तक चीन के कई हिस्सों पर कब्जा किया था। दोनों देशों के बीच 1894-95 और 1937-45 तक दो बार युद्ध भी हुए हैं। दूसरा युद्ध सेकेंड वर्ल्ड वार का हिस्सा रहा था। सैन्य और आर्थिक ताकत बढ़ने के बाद चीन अपने पड़ोसियों के साथ क्षेत्रीय विवाद पर काफी आक्रामक हुआ है। चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी सशस्त्र सेना है और पिछले एक दशक से हर साल इसका सैन्य बजट भारी भरकम होता गया है।