ल्हासा. दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्तियों में से एक चीन उस एक व्यक्ति से डरता है. वो उसके वजूद को मिटा देना चाहता है. चीन उसकी एक-एक सांस पाप समझता है. वो व्यक्ति कोई और नहीं तिब्बत का 'दलाई लामा' है.
अपनी जान बचाने की गरज से युवा दलाई लामा 1959 में तिब्बत छोड़कर भारत के धर्मशाला में आ गया था. कहा जाता है कि यह चीन को यह इतना नागवार गुजरा कि उसने भारत से 1962 की भीषण लड़ाई लड़ी.
14वें दलाई लामा ने भारत के पूर्वी छोर धर्मशाला को ही अपना आसरा बनाया. दुनियाभर से लाखो श्रद्धालु उनके दर्शन करने भारत चले आते हैं.
आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि तिब्बत की राजधानी ल्हासा में दलाई लामा अपना शानदार महल छोड़कर भारत में शरण ली थी. ल्हासा में पोटाला पैलेस को 1994 में यूनेस्को ने वर्ल्ड हैरिटेज घोषित किया था.
dainikbhaskar.com अपने पाठकों को तस्वीरों में माध्यम से बता रहा है पोटाला महल का इतिहास और अंदर के शानदार नजारे....