6800 कॉलेज कर्मचारी हड़ताल पर

रांची .राज्य के पांचों विश्वविद्यालयों के 65 कॉलेजों के 6800 कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। कर्मियों की हड़ताल से कॉलेजों में कार्यालय संबंधी कार्यों पर व्यापक असर पड़ा। वहीं पढ़ाई-लिखाई भी आंशिक प्रभावित हुई।
क्लास रूम खोलने वाले ही नदारद रहे। यही हाल साफ-सफाई का रहा। कर्मचारी सुबह 10 बजे ही अपने-अपने कॉलेजों में इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने लगे। सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।यह हड़ताल झारखंड विवि एवं कॉलेज कर्मचारी महासंघ के बैनर तले की जा रही है। उनका कहना है कि उनकी मांगों के प्रति सरकार संवेदनशील नहीं है। वर्ष 2007 और 2010 में हुए समझौते का अब तक क्रियान्वयन नहीं हो सका है।
राजधानी के रांची कॉलेज, वीमेंस कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, जेएन कॉलेज धुर्वा, रामलखन सिंह यादव कॉलेज में कार्यालय संबंधी कार्य ठप रहे। हड़ताल का नेतृत्व मुख्य रूप से महामंत्री शिवजी तिवारी, संरक्षक कन्हैया मिश्र, अध्यक्ष ललित सिंह, पवन जेडिया, ए जहीर, सुदर्शन पांडेय, बुधराम उरांव और बिहारी सिंह ने किया।
नहीं हुआ प्रैक्टिकल
रांची कॉलेज के डॉ. एसके साहू और डॉ. नमिता सिंह ने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल से प्रैक्टिकल नहीं हुआ। कक्षाओं के संचालन में कठिनाई हुई। शिक्षक समय पर कॉलेज तो पहुंच गए, लेकिन क्लास रूम समय पर नहीं खुले, जिससे परेशानी हुई। हड़ताल लंबे समय तक रही तो अगले दो-तीन दिनों में परेशानी और बढ़ेगी।
प्रमाण-पत्र निर्गत नहीं हुआ
रांची कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एएन ओझा ने बताया कि कर्मियों की हड़ताल के कारण प्रमाण-पत्र निर्गत नहीं हुए। सीएलसी, माइग्रेशन, आईकार्ड समेत अन्य सर्टिफिकेट के लिए कॉलेज आए स्टूडेंट्स को निराश लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित करने में भी परेशानी हो सकती है। कक्षाएं बाधित होने की आशंका के मद्देनजर कुछ कर्मचारियों को अनुबंध पर रखा गया है। वे कार्य कर रहे हैं।
मैट्रिक व इंटर परीक्षाएं होंगी प्रभावित
जैक द्वारा ली जाने वाली मैट्रिक और इंटर कला, विज्ञान और वाणिज्य की परीक्षा 22 फरवरी से है। कई कॉलेजों को केंद्र बनाया गया है। कर्मचारियों की हड़ताल से एग्जाम संचालन में भारी कठिनाई होगी। इन दोनों परीक्षाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना भी आसान नहीं होगा।
कर्मचारियों की मुख्य मांग
सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करें।
पंचम वेतनमान में व्याप्त विसंगतियां दूर हों।
वेतन वृद्धि उन्नयन योजना (एसीपी) का लाभ दिया जाए।
राज्य कर्मचारियों की तरह कॉलेज कर्मचारियों को छठा वेतनमान दिया जाए।
पंचम वेतनमान के एरियर का तत्काल भुगतान किया जाए।







