रांची। संजीवनी का एलान, बिहार झारखंड में हो सबका मकान! साल 2005 में अचानक उभरे इस एक स्लोगन ने करीब सैकड़ों लोगों के सपनों को ऐसे लील लिया जैसे किसी जश्न मनाते शहर को सुनामी। जो जाती हुई जिंदगी लौटा दे, उसे संजीवनी कहा गया है, इस संजीवनी ने एक अदद छत का सपना संजोए करीब 500 भोले-भाले लोगों की उम्मीदों का गला ही घोंट दिया। गत 2 जनवरी को मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने धोखाधड़ी के इस चर्चित मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने का निर्देश जारी कर दिया। यह मामला इतना हाईप्रोफाईल था, इसमें इतना बड़ा रैकेट काम कर रहा था कि उसके बारे में जानने पर एकबारगी विश्वास कर पाना मुश्किल होगा।
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