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हिंदी दिवस पर विशेष तस्वीरें : हे राम! हिंदी प्रदेश में ऐसी हिंदी

रविशंकर सिंह . | Sep 14, 2012, 12:04PM IST
हिंदी दिवस पर विशेष तस्वीरें : हे राम! हिंदी प्रदेश में ऐसी हिंदी

रांची. आज हिंदी दिवस है। हिंदी के विकास और इसके प्रचार प्रसार करने के वादों का दिन। राजधानी में सरकारी और अन्य संस्थानों में हिंदी पर केंद्रित कई कार्यक्रम और सेमिनारों का आयोजन किया गया है। लेकिन शहर के ही कई विभागों व संस्थानों में हिंदी का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है। जिससे राज्य की साख पर बट्टा लग रहा है।
 
सरकारी विभागों में भले ही हिंदी भाषा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई जाती हो, लेकिन यह महज दिखावा है। हिंदी में काम करने और इसके विकास के दावों में खोखलापन झलक रहा है। ऐसा हम नहीं बल्कि खुद सरकारी विभागों में हिंदी भाषा में लिखे गए संकेतक, नेम प्लेट और सूचनापट्ट कह रहे हैं। डीबी स्टार ने हिंदी दिवस के मद्देनजर हिंदी में लगाए गए नेम प्लेट, संकेतकों व सूचना पट्टों का जायजा लिया। इसमें पता चला कि हिंदी के साथ भयंकर खिलवाड़ किया जा रहा है। जिन सूचना पट्टों को बनाने में जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, उसे बनाने में काफी अनियमितता बरती जा रही है। सरकारी विभागों समेत कई संस्थानों में लिखी गई हिंदी भाषा की कई अशुद्धियां हैं।
 
अशुद्धियों से अफसर अनजान
 
पर्यटन विभाग, नगर निगम और पथ प्रमंडल के संकेतकों व नेम प्लेटों में भाषा की अशुद्धियों से अफसर अनजान हैं। डीबी स्टार ने पर्यटन उप सचिव व मेयर से उनके नेम प्लेट के बारे में पूछा तो उन्होंने इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही।
 
लाखों रुपए खर्च होते हैं संकेतकों में
 
डीबी स्टार ने संकेतकों के बनाने के बारे संबंधित विभाग के अफसरों से बात की। इसमें पता चला कि नेम प्लेट और संकेतकों के लगाने का काम टेंडर के जरिए कराया जाता है। इसमें कई स्तरों में जांच और अशुद्धि जांचने की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है। यही नहीं, पथ प्रमंडल के बड़े संकेतकों को बनाने में तो लाखों रुपए का खर्च आता है। पथ विभाग के अलावा स्कूलों, बैंकों व अन्य संस्थानों के बोर्ड में भी कई जगह हिंदी की अशुद्धियां डीबी स्टार ने पाई।
 
शर्म की बात है
 
"नेम प्लेट व संकेतकों में हिंदी भाषा की अशुद्धि शर्म की बात है। इसमें तुरंत सुधार होना चाहिए। हिंदी भाषी राज्य में हिंदी की ऐसी अनदेखी गंभीर बात है। इससे पता चलता है कि हिंदी को लेकर जिम्मेवार अपनी जवाबदेही से अनजान हैं।"- बीएन पांडेय, विभागाध्यक्ष, हिंदी, आरयू.
 
"हिंदी को लेकर झारखंड में ऐसी स्थिति हास्यास्पद है। झारखंड जैसे हिंदी भाषी प्रदेश में सरकार व अधिकारियों की इस ओर अनदेखी काफी गंभीर है। हिंदी के विकास को लेकर सरकार और अधिकारियों को फिक्र ही नहीं है। हिंदी की ऐसी स्थिति से दिल दुखता है।" - डॉ अशोक प्रियदर्शी, वरिष्ठ साहित्यकार.
 
राजधानी में पथ प्रमंडल रांची द्वारा संकेतक लगाए जाते हैं। इसका उद्देश्य होता है लोगों को विभिन्न इलाकों की पहचान कराना अथवा उस जगह से इलाके की दूरी की जानकारी देना। रांची आने वाले पर्यटकों के अलावा अन्य लोगों को इन संकेतकों से विभिन्न इलाकों के बारे में आसानी से जानकारी हो जाती है। लेकिन शहर में पथ प्रमंडल रांची द्वारा लगाए गए संकेतक राजधानी की छवि धूमिल करने का काम कर रहे हैं। संकेतकों में हिंदी भाषा की कई अशुद्धियां हैं। हद तो यह है कि पथ प्रमंडल के अफसरों ने पुराने के साथ साथ नए संकेतकों में भी सुधार नहीं कराया। संकेतकों में कुछ शब्दों जैसे पिस्का मोड़, बिल्डिंग, सड़कों के लिखने में पूरी लापरवाही बरती गई है। हिंदी के जानकार और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अशोक प्रियदर्शी कहते हैं कि हिंदी की अशुद्धि से राजधानी समेत पूरे राज्य में हिंदी की छवि खराब हो रही है।
 
जल्द दूर होगी अशुद्धि
 
"हमने अभी तक अपना नेम प्लेट नहीं देखा है। वैसे अगर नाम पट्ट में अशुद्धि है तो इसे बनाने वाले दोषी हैं। मैं जल्द ही इसके बारे में पूछताछ करके नामपट्ट की अशुद्धि दूर कराऊंगी। निगम में लगाए गए अन्य सूचना पट्टों की अशुद्धि जल्द दूर की जाएगी।" - रमा खलखो, मेयर, रांची.

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