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अगर आप खा रहे हैं फल-सब्जी तो पढ़िए ये चौंका देने वाली खबर!
अमित रंजन.
| Aug 10, 2012, 01:03AM IST

हमारा खाना कितना हेल्दी
बाजार में बड़े और ताजे दिखने वाले फल और सब्जी हमारी सेहत के लिए उतने ही खतरनाक हैं, जितना की जहर। जहर किसी व्यक्ति को चंद मिनटों में मौत देती है, जबकि जहर में सने ये फल और सब्जी धीरे-धीरे मारता है। अपने मुनाफे के चक्कर में फल और सब्जी कारोबारी धीमी मौत का खेल बेधड़क खेल रहे हैं और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट लागू होने के बावजूद जिम्मेवार अधिकारी दफ्तरों में बैठे तमाशा देख रहे हैं। नतीजा हमारा पैसा भी खर्च हो रहा है और सेहत भी खराब हो रही है।
फल पकाने में होता है कार्बाइड का इस्तेमाल
फल को पकाने के लिए अक्सर कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक प्रकार का केमिकल है, जिसे कच्चे फलों में डाला जाता है। इससे निकलने वाला गैस फलों को कृत्रिम गर्मी देता है और फल पक जाता है। कार्बाइड से पके फल बेस्वाद तो होते ही हैं, स्वास्थ्य के लिहाज से भी हानिकारक है।
ऑक्सीटोसिन से बढ़ाया जाता है सब्जियों का आकार
सब्जियों को जल्दी बड़ा करने के लिए ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल किया जाता है। ऑक्सीटोसिन मवेशियों को दिया जाता है, जिसके प्रभाव से वह दूध ज्यादा देती है। लाभ कमाने के लिए सब्जी व्यवसायी इसका प्रयोग करते हैं। इससे एक तो सब्जी जल्दी तैयार हो जाती है, वहीं इसका आकार भी सामान्य से बड़ा होता है।
मिथेलिन से चमकीला बनते हैं फल और सब्जी
फलों और सब्जियों को बड़ा और आकर्षक बनाने के लिए मिथेलिन नामक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है। इसके घोल में फलों और सब्जियों को रखा जाता है। यह एक कीटनाशक है। इसके इस्तेमाल से फल और सब्जी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाता है।
> सब्जी इस्तेमाल करने से पहले रखें ख्याल
> फलों और सब्जियों के इस्तेमाल के पहले गर्म पानी में उन्हें अच्छी तरह धो लें।
> बासी फलों और सब्जियों के इस्तेमाल से बचें। रसायन के अंदर जाने का खतरा बना रहता है।
> चमकीले और आकर्षक फलों और सब्जियों को खरीदने के पहले अच्छी तरह देख-परख लें।
एक्सपर्ट व्यू
"उत्पादन बढ़ाने और मुनाफा कमाने के चक्कर में हम फलों और सब्जियों पर लगातार रसायन की वर्षा करते रहते हैं। इसका कुप्रभाव अब हमारे सामने है। फलों और सब्जियों में रहने वाले मित्र कीट खत्म हो गए हैं और हानिकारक कीटों की तादाद काफी बढ़ गई है। यह न सिर्फ हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे कृषि की पूरी परिस्थिति गड़बड़ा गई है।" - डॉ अशोक कुमार, कृषि वैज्ञानिक






