रांची। बुरा न मानो होली है! किसी पर रंग डाला और इतना कह कर ठठा कर हंस पड़े। जिस पर रंग डाला वह भी मुस्कुरा गया और आ गया मजा। दोस्ती-यारी और रिश्तों की अनुमति हो तो होली में रंग खेलने में लिंग भेद भी बाधा नहीं बनती। पर यहां ऐसा किया, तो आप चाहो न चाहो आपकी शादी पक्की। हम बात कर रहे हैं झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में बसे एक आदिवासी समुदाय की। यहां के संथाल आदिवासियों में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसलिए यहां होली तो खेली जाती है पर रंगों से नहीं बल्कि सिर्फ पानी से।
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