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भूमि अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन, बाबूलाल उपवास पर

Agency. | Jul 10, 2012, 16:47PM IST
 
 

रांची. झारखण्ड की राजधानी रांची के बाहरी इलाके में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) तथा विधि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिगृहित भूमि वापस लेने के लिए प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को मंगलवार को राज्य के दो विपक्षी दलों- कांग्रेस व झारखण्ड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक (जेवीएमपी) तथा सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार में शामिल झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का समर्थन मिला। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व जेवीएमपी के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने किसानों के समर्थन में तथा जमीन अधिग्रहण और पिछले सप्ताह प्रदर्शनकारी ग्रामीणों पर लाठीचार्ज करने के विरोध में रांची के मोराबादी मैदान पर एक दिवसीय अनशन किया।

किसानों के समर्थन में कांग्रेस ने भी सोमवार को राजभवन के सामने प्रदर्शन किया था। पार्टी के नेता स्टीफेन मरांडी ने मंगलवार को कहा, "कृषि भूमि जबरन नहीं ली जानी चाहिए।"

राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह परेशान करने वाला मुद्दा है, क्योंकि सरकार में शामिल जेएमएम भी इसका विरोध कर रही है। झारखण्ड के कृषि मंत्री व भाजपा नेता सत्यानंद झा ने कहा, "मुद्दे का समाधान बल प्रयोग किए बिना मैत्रीपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए।"

रांची से 20 किलोमीटर दूर नागरी में 227 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करीब 50 साल पहले किया गया था। इस भूमि पर सरकार ने काम शुरू नहीं किया था, इसलिए किसान इसे खेती के लिए इस्तेमाल कर रहे थे।

राज्य सरकार ने पिछले साल इस भूमि पर आईआईटी, आईआईएम और विधि विश्वविद्यालय के निर्माण का निर्णय लिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने अधिग्रहण का विरोध करना शुरू कर दिया।

भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ग्रामीणों ने झारखण्ड उच्च न्यायालय में अपील की, जिसने इस साल अप्रैल में राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भूमि पर निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा। उच्च न्यायालय से निराशा हाथ लगने के बाद प्रभावित लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च न्यायालय ने जून में इस मामले की सुनवाई करने से भी इंकार कर दिया।

लोगों को जब सर्वोच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिली तो उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया। पिछले सप्ताह उन्होंने भूमि पर बनाई गई बाउंड्री की दीवार तोड़ दी। उनकी पुलिस से भी झड़प हुई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया, जिसमें करीब 20 लोग घायल हो गए।

पुलिस की कार्रवाई का विभिन्न दलों ने भारी विरोध किया। झारखण्ड के राज्यपाल सैयद अहमद ने भी इस सम्बंध में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
 
 
 

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