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खुलासा : अब हेलीकॉप्टर भी मार गिराएंगे नक्सली, CG में बना रहे राइफल व ग्रेनेड

अमित राजा/अंजनी सिन्हा। | Dec 18, 2012, 15:55PM IST
खुलासा : अब हेलीकॉप्टर भी मार गिराएंगे नक्सली, CG में बना रहे राइफल व ग्रेनेड







रांची/गिरिडीह। भाकपा (माओवादी) ने विध्वंसकारी वारदातों को अंजाम देने के साथ रचनात्मक आंदोलन के मोर्चे पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना शुरू कर दिया है। दो कदम आगे और एक कदम पीछे की रणनीति पर चलने वाले माओवादियों ने तथाकथित वर्ग शत्रुओं और दुश्मनों से मुकाबले के लिए सैन्य ताकत हासिल कर ली है, वहीं रचनात्मक आंदोलन व विकास में अपनी भूमिका तय कर अपनी विध्वंसक छवि में भी सुधार की मुहिम छेड़ी है। माओवादियों ने हेलीकॉप्टर से हमले का जवाब भी खोज निकाला है। इसका खुलासा केंद्रीय नेता और केंद्रीय मिलिट्री कमीशन के सदस्य मोतीलाल टुडू उर्फ मोतीलाल सोरेन ने बीते दिनों पुलिस को दिए अपने बयान से किया है। करीब साढ़े तीन साल पहले रांची पुलिस के सामने माओवादी नेता के 32 पन्नों के बयान से कई ऐसी बातें भी छन कर आई हैं, जिससे आमलोग अंजान थे। हेलीकॉप्टर को मार गिराने के लिए माओवादियों के पास टेक्नोलॉजी आ गई है। इसके लिए वे मोर्टार, एसएलआर आदि से लैस हैं। संगठन छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य में सबसे मजबूत स्थिति में है और वहां एसबीएल/डीबीबीएल राइफल और ग्रेनेड निर्मित हो रहा है। 

सूबे में सालाना सात करोड़ की लेवी वसूली 

केवल झारखंड में माओवादी सालाना करीब सात करोड़ रुपए की लेवी वसूलते हैं। यह आंकड़ा माओवादी नेता के बयान से निकाला गया। बयान के अनुसार बिहार झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी को सालाना 15 लाख रुपए की लेवी मिलती है। अब इस स्पेशल एरिया कमेटी में छत्तीसगढ़ को शामिल कर लेने के बाद संगठन की लेवी से कमाई कोई 22 लाख रुपए तक पहुंच गई है। लेवी का पैसा झारखंड में री जोन में जमा होता है। री जोन के सदस्य ही किसी सुरक्षित ठिकाने में पैसा रखते हैं। जबकि पोलित ब्यूरो व केंद्रीय कमेटी का पैसा पहले कोलकाता में रखा जाता था, अब दंडकारण्य में रखा जाता है। 

लड़ाके खुद करते हैं हथियारों की मरम्मत 

हथियारों में छोटी-मोटी खराबी आने पर लड़ाके खुद उसकी मरम्मत कर लेते हैं। लेकिन खराबी पकड़ में नहीं आने पर छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य में भेजकर मरम्मत कराई जाती है। वैसे छोटी-मोटी खराबी को दुरूस्त करने में प्लाटून या दस्ता के लड़ाके खुद सक्षम हैं, क्योंकि उन्हें इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिए जाते हैं। 

आरपीसी के गठन को मानते हैं उपलब्धि 

माओवादी ग्रामीण क्षेत्रों में आरपीसी यानी रिवॉल्युशनरी पीपुल्स कमेटी के गठन को बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। अमूमन विध्वंसक वारदातों को अंजाम देने वाले माओवादियों ने इस कमेटी का गठन अपने प्रभाव वाले इलाकों में निर्माण के कामों में योगदान देने के लिए किया है। इस कमेटी के जरिए अपने प्रभाव वाले इलाकों में संगठन ने रचनात्मक आंदोलन संचालित किया है। इस कमेटी के जिम्मे पंचायत सत्र पर विकास, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य व न्याय विभाग को शामिल किया गया है। इसके काम ग्रामीण क्षेत्र के ग्रामीण खुद करते हैं। एरिया कमेटी के चीफ को ही आरपीसी का प्रधान बनाया गया है। भीम बांध में 3000 जनता के लिए एक कमेटी बनी है। पारसनाथ क्षेत्र में 1800 ग्रामीणों को लेकर आरपीसी का गठन हुआ है। पीरटांड़ के बीरबल को इसका प्रभारी बनाया गया है। सारंडा के 3500 ग्रामीणों को लेकर आरपीसी गठित हुई है। इसी तरह कई अन्य इलाकों में कमेटी का गठन किया गया है। 

यह कमेटी इलाके में सिंचाई से लेकर विकास के अन्य कामों में योगदान करेगी और इससे सरकारी कर्मियों व अन्य ग्रामीणों को भी जोडऩे की योजना है। 

पुलिस पूरी तरह सक्षम: एसपी 

"माओवादियों से मुकाबले के लिए पुलिस पूरी तरह सक्षम हैं। कम्यूनिटी पुलिसिंग के तहत संचालित कार्यक्रमों के कारण आम जनता पुलिस फ्रेंडली हो गई है। माओवादियों की हरकतों से आमलोग आजिज हैं। माओवादियों का आतंक नहीं चलेगा।" - अमोल वी होमकर, एसपी, गिरिडीह। 
 

 

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