जमशेदपुर।एसएसपी कार्यालय के सामने फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने का धंधा चल रहा है। पुराना कोर्ट परिसर के सामने दर्जनों दलाल खुलेआम घूम रहे हैं। ये 300 रुपए लेकर घंटे भर के अंदर फर्जी लाइसेंस बनाने का काम करवाते हैं। यह बिल्कुल असली लाइसेंस के माफिक दिखता है। डीबी स्टार की टीम को कुछ दिनों से इस बात की जानकारी मिल रही थी।
नकली डीएल के खेल को जानने के लिए डीबी स्टार की टीम ने स्टिंग ऑपरेशन चलाया। टीम ने दो दिनों तक पुराना कोर्ट परिसर में घूम कर जानकारी लेने की कोशिश की। इसमें मालूम हुआ कि कोर्ट में परिसर में लगने वाले अनेक दुकानों में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का अवैध धंधा चल रहा है।
ग्राहकों की तलाश में दलाल कोर्ट परिसर में घूमते रहते हैं। वे लोगों को रोककर पूछते रहते हैं। टीम के सदस्य को भी एक दलाल ने सवालिया लहजे में पूछा की आपको क्या बनवाना है। टीम ने कहा कि मुझे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है। इतना सुनते ही दलाल ने कहा कि यह तो घंटे भर का काम है। झट से टीम ने लाइसेंस बनाने के लिए हामी भर दी। साथ ही टीम ने जाना कि ये लोग किसी का भी लाइसेंस बनवा सकते हैं। इन्हे तो सिर्फ पैसे से मतलब है।
उक्त व्यक्ति अपराधी है या नक्सली, इस बात से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। टीम के एक सदस्य ने अपना लाइसेंस बनाने के साथ शहर के ट्रैफिक डीएसपी राकेश मोहन सिन्हा की तस्वीर देते हुए लाइसेंस बनाने की बात कही।
उसने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि यह तस्वीर किसकी है? तकरीबन 30 मिनट के अंदर ही उसने टीम के सदस्य और डीएसपी का लाइसेंस बनाकर दे दिया। साथ ही दलाल ने कहा कि वह किसी भी तरह के कागजात बना सकते हैं। उन्होंने फर्जी डीड बनाने की बात बताई।
ऐसे बनता है फर्जी लाइसेंस
फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए एक पासपोर्ट साइज की तस्वीर, नाम और पता एक सादे कागज में लिखकर देने की बात कही जाती है। पता के लिए न तो आईडी प्रूफ मांगी जाती है और ना ही यह जानने का प्रयास किया जाता है कि इस पर अंकित पता सही है या गलत। एक लाइसेंस के लिए 300 रुपए लिया जाता है।
लगा है डीटीओ का स्टांप
फर्जी लाइसेंस में जिला परिवहन विभाग का मुहर भी लगा है। पहले पन्ने पर अशोक स्तंभ के साथ गोलाई में डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर जमशेदपुर लिखा है। तीसरे पन्ने पर भी हस्ताक्षरयुक्त जिला परिवहन विभाग का मुहर अंकित है। काफी शातिर तरीके से काम किया गया है। जांच के दौरान आसानी से असली और नकली डीएल की पहचान कर पाना मुश्किल है।
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