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विजय दिवस : थम रही थीं सासें, घुस गया दुश्मन के बंकर में, डेढ़ KM तक दिया खदेड़

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रांची। वीरता, त्याग, तपस्या की भावनाएं भारतभूमि की परंपरा रही हैं। भारतमाता के सपूतों के लिए वीरगति को प्राप्त होना स्वर्ग प्राप्त होने के बराबर माना गया है। इस धरती पर एक से एक वीर हुए जिन्होंने मुल्क की सरहद को माता का वस्त्र मानकर उसकी रक्षा के लिए अपनी जान दे दी। आज हम एक ऐसे ही शहीद की कहानी पेश कर रहे हैं। मरणोपरांत परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले भारत मां के इस बहादुर बेटे का नाम था अलबर्ट एक्का। लांस नायक अलबर्ट एक्का ने 1962 के भारत-चीन युद्ध में अपनी बहादुरी दिखाई ही पर उसके बाद 1971 के भारत पाक युद्ध में जो काम अकेले कर दिखाया, वह शायद उनके बिना मुश्किल था। अलबर्ट एक्का ने इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना को डेढ़ किलोमीटर तक पीछे धकेल दिया था और गंगासागर अखौरा को पाक फौज के नापाक कब्जे से आजाद कर दिया था। इस अभियान के समय वे काफी घायल हो गये थे और 3 दिसम्बर 1971 को इस दुनिया से विदा हो गए थे। लांस नायक अलबर्ट एक्का बिहार रेजीमेंट के चौदहवीं बटालियन में थे। ये पूर्वी भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता हुए।


अब तस्वीरों की जुबानी सुनिए भारत मां के वीर सपूत अलबर्ट एक्का की बहादुरी की कहानी...


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