रांची। अपनी विश्वप्रसिद्ध रचना 'गीतांजलि' के लिए एशिया में पहले नोबेल विजेता का सम्मान प्राप्त करने वाले गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को कौन नहीं जानता। गुरुदेव ने अपनी प्रतिभा के बल पर देश-विदेश के बडे विचारकों, लेखकों के बीच अपनी जगह बनाई और राष्ट्रकवि कहलाए। टैगोर परिवार तो मूलतः कोलकाता निवासी था, पर उनका रांची से भी गहरा नाता रहा है। रांची आज नवोदित राज्य झारखंड की राजधानी है पर उस जमाने में अपने सुहावने मौसम के लिए अंग्रेंजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित था।
ऊपर जो तस्वीर दिखाई दे रही है वह रांची का टैगोर हिल की है। यह पहाड़ी कभी शहर से करीब 4 किलोमीटर दूर थी पर अब शहर ही फैलते फैलते उसके करीब पहुंच चुका है। इस पहाड़ी का नामकरण गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई ज्योतिंद्रनाथ टैगोर के नाम पर ही हुआ है। इससे पहले यह मोरहाबादी पहाड़ के नाम से जाना जाता था। ज्योतिंद्रनाथ ने इस पहाड़ी को वहां के जमींदार हरिहर सिंह से सन् 1908 में खरीदा था।
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