रांची। दिलीप छह वर्षों से खाट पर है। लक्ष्मी, मोहित, शिवेंदु पांच-सात वर्ष की उम्र में भी कुछ समझ बोल नहीं पाते। साधन और बटेश्वर के बच्चों की भी यही दशा है। ये बच्चे मेंटली और फिजिकली बीमार हैं।
यह स्थिति है सिल्ली प्रखंड के एक छोटे से गांव बंता की। यहां हर घर में बीमार हैं। कहीं बच्चे, तो कहीं बुजुर्ग। बगल के हजाम टोले की भी लगभग यही कहानी है। बंता में लगभग पांच वर्षों में डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों को पैरालाइसिस (लकवा) अटैक हुआ है। स्थानीय डाक्टर मो. मनीर कहते हैं, यहां लगभग हर घर का बीपी हाई है। बीपी और ब्रेन हेमरेज से पूर्व मुखिया सहित कुछ की मौत भी हो चुकी है। कई लोग तो अब नपुंसकता का इलाज भी कराने लगे हैं। जानकारी डीसी को भी है, लेकिन आज तक निदान तो दूर कारणों की जांच भी न हो सकी।
उपायुक्त से की थी शिकायत
सिल्ली युवा कांग्रेस अध्यक्ष राकेश किरण महतो ने नवंबर में ही डीसी रांची को मामले की लिखित शिकायत करते हुए बंता गांव में लगाए गए मोबाइल टावरों के रेडिएशन को नियंत्रित कराने का अनुरोध किया था। डीसी को दिए पत्र में उन्होंने कहा है कि रेडिएशन के कारण अब तक बंता हजाम गांव में 18 लोगों की असमय मौत हो चुकी है। कई लोग लकवा ग्रस्त हो चुके हैं। नपुंसकता, बांझपन व विकलांग बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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