PAIN : 'आबरू तो बचा ली, पैर कौन लौटाएगा, पुलिस नहीं तो अल्लाह देगा सजा!'

रांची। आज डेढ़ माह से बेड पर हूं। न तो चल सकती हूं और न ठीक से बैठ ही सकती हूं। अल्लाह उनको भी नहीं छोड़ेगा। पुलिस सजा दे या न दे, ऊपरवाला तो जरूर देगा। आज उन दोनों की वजह से मैं यहां बेजान पड़ी हूं। मेरी मां पर क्या गुजर रही है। यह कोई नहीं जानता है। इलाज चल रहा है, लेकिन कब चलूंगी यह कोई नहीं बताता है।
यह पीड़ा है मेराल, गढ़वा की नाजिया(बदला हुआ नाम) का। नाजिया नौवीं की छात्रा है। पिछले कई दिनों से वह रिम्स के आर्थोपेडिक यूनिट में इलाजरत है। वह गांव के ही बदमाशों के बूरी नजर से तो बच निकली, लेकिन घटना में अपने दोनों पैर गवां बैठी है। डॉ एलबी मांझी की देखरेख में इलाज चल रहा है।
भास्कर से बातचीत के क्रम में नाजियाकी आंखें भर जाती है। उसने बेड पर पड़े पड़े ही अपनी पीड़ा से रूबरू कराया। स्कूल से लौटने के क्रम में गांव के राजेश व देवेंद्र नामक युवक ने स्कूटर से घर छोडऩे की बात पर राजी कर दुष्कर्म का प्रयास किया। लेकिन, वे सफल नहीं हो सके। जब वे गांव के रास्ते पर नहीं जाकर दूसरी ओर स्कूटर मोड़ा तो अनहोनी की आशंका हुई। थोड़ी दूर जाने के बाद वह स्कूटर से कूद गयी। इसके बाद देवेंद्र ने स्कूटर उसके पैर पर ही चढ़ा दिया।
दर्द से छटपटाती नाजिया को अंतत: राजेश ने ही अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद से दोनों फरार है। बेटी के साथ साथ शबीना की मां हसीना बीबी कहती है कि पुलिस दोषियों को सजा दे या न दें, अल्लाह जरूर देगा। हम गरीबों का किसी से क्या कसूर। मालूम हो कि नाजिया अपने मां के साथ रहती है। मां सब्जी बेचकर जीवन यापन करती है। कर्ज लेकर बेटी का इलाज करा रही है।








