रांची/गुमला। करीब 400 साल पहले वर्तमान झारखंड के इस वनाच्छादित क्षेत्र में नागवंशियों राजाओं का शासन था। तब यह पूरा क्षेत्र छोटानागपुर कहलाता था। राजधानी रांची से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित डोइसागढ़ में उनकी निशानियां जीर्ण-शीर्ण अवस्था में आज भी शान से खड़ी हैं और नागवंशी शासन के गौरवशाली अतीत की गाथा सुना रही हैं। कभी पांडव वंश के राजा परीक्षित को समाप्त करने वाले तक्षक के इन वंशजों से मुगल भी टकराए लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी।
डोइसागढ की कहानी शुरू होती है राजा दुर्जनशाल से, जिन्होंने गद्दी संभालते ही मुगलों की अधीनता ठुकरा दी और मालगुजारी देना बंद कर दिया। मुगल बादशाह जहांगीर को एक भारतीय राजा का यह चैलेंज नागवार गुजरा। जहांगीर को यह भी मालूम था कि कोकरह (अब छोटानागपुर) ती नदियों से हीरा निकलता है। मालगुजारी का बहाना बनाकर उसने सन् 1615 में इब्राहिम खां को दुर्जनशाल पर चढ़ाई कर हीरों की खानों पर कब्जा करने का आदेश दे दिया। अचानक कायरतापूर्ण हमले से राजा संभल न सके और गिरफ्तार कर लिए गए।
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