एक ही पद एक आ गए दो अधिकारी, रोज कर रहे मारामारी

रांची/जमशेदपुर। गोलमुरी नियोजनालय में सहायक निदेशक के पद पर दो अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है। इससे दफ्तर में गहमा-गहमी का माहौल है। गौरतलब है कि 18 दिसंबर को सरकार ने अधिसूचना जारी कर पहले से पदस्थापित दशरथ अंबुज का तबादला किए बगैर धनबाद में पदस्थापित सहायक निदेशक शशि भूषण झा को जमशेदपुर का नया सहायक निदेशक बना दिया। इसके बाद श्री झा ने आनन-फानन में चेंबर में अपने नाम का बोर्ड भी लगा दिया।
वहीं, दशरथ अंबुज ने दूसरे दिन शशिभूषण झा को चेंबर में प्रवेश करने से मना कर दिया। गुरुवार को भी श्री झा को चेंबर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इससे नए सहायक निदेशक कई घंटे तक चेंबर के दरवाजे पर ही डटे रहे। दो दिन से यही स्थिति बनी हुई है। सरकार के वरीय अधिकारी को इसकी जानकारी होने के बावजूद वह इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, अधिकारियों के बीच कुर्सी को लेकर चल रही मारामारी से बेरोजगार युवकों को नियोजनालय में नाम दर्ज कराने में परेशानी हो रही है।
दरवाजे पर नए निदेशक
सहायक निदेशक के चेंबर पर दशरथ अंबुज का कब्जा है। नए सहायक निदेशक शशिभूषण झा को चेंबर में बैठने की इजाजत नहीं मिली, तो वह दरवाजे पर ही जमे रहे।
पुराने को नहीं हटाया
श्रम एवं नियोजन विभाग ने नियोजनालय के नए सहायक निदेशक के तौर पर शशिभूषण झा को पदस्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी। इसमें वर्तमान सहायक निदेशक के बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं दिया गया।
18 को जारी हुई अधिसूचना
18 दिसंबर को श्रम एवं नियोजन विभाग के अवर सचिव के आदेश पर राज्यभर के सहायक निदेशक के तबादले एवं नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की गई थी। इस अधिसूचना में शशिभूषण झा को भी नया सहायक निदेशक बनाया गया था।
चेंबर में पुराने अधिकारी
नियोजनालय के सहायक निदेशक दशरथ अंबुज चेंबर में डटे हुए हैं और कार्यों का भी निष्पादन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे अब भी सहायक निदेशक हैं और सरकार ने उन्हें हटने का आदेश नहीं दिया है।
कार्यालय के बाहर लगा दिया बोर्ड
नए सहायक निदेशक की अधिसूचना जारी होने के बाद शशिभूषण झा गोलमुरी स्थित नियोजनालय कार्यालय पहुंचे। उन्होंने चेंबर के मुख्य दरवाजे पर लगा दशरथ अंबुज का नेम बोर्ड हटाकर अपना नाम का बोर्ड लगवा दिया। हालांकि, अभी तक उन्हें चेंबर में बैठने का मौका नहीं मिला है।
दो दिन से संभाल रहे काम
शशिभूषण झा 18 दिसंबर को नियोजनालय का काम संभाल लिया। उन्होंने कार्यालय के रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर औपचारिकताएं पूरी की। इसके बाद उन्होंने कई फाइलों पर हस्ताक्षर भी किया। बाद में नए सहायक निदेशक ने पदभार संभालने की जानकारी उपायुक्त को भी दे दी थी।
छेडख़ानी के आरोप में आठ दिन बंद थे जेल में
सहायक निदेशक दशरथ अंबुज पर एक महिला कर्मचारी ने छेडख़ानी का आरोप लगा था। आठ दिन तक जेल में रहने के बाद भी वह अपने पद पर बने रहे। नियम के मुताबिक कोई सरकारी सेवक किसी भी मामले में 24 घंटे पुलिस हिरासत में रहता है, तो वह स्वत: निलंबित माना जाता है। लेकिन, उन्हें पद से नहीं हटाया गया।
हुई थी कहा-सुनी, कर्मचारियों ने किया बीच-बचाव
20 दिसंबर को जब दशरथ अंबुज कार्यालय पहुंचे, तो कुछ देर बाद ही नए सहायक निदेशक पदभार लेने पहुंच गए। इसे लेकर दोनों अधिकारियों के बीच कहा-सुनी भी हुई थी। हालात यह थे कि कर्मचारियों को बीच-बचाव करना पड़ा था।
इस तरह से लडऩा गलत है
"नई अधिसूचना को ही आधार माना जाएगा। दोनों अधिकारी आपस में लड़ रहे हैं तो गलत है। श्रम एवं नियोजन विभाग के सचिव बाहर हैं। इसलिए पुराने पद से हटाने संबंधी आदेश जारी नहीं हुआ है।" - विश्वनाथ शाह, निदेशक, श्रम एवं नियोजन विभाग।






