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हो रही थी दफ़नाने की तैयारी कि कब्र में आंखें खोल मांग बैठी पानी

संतोष कुमार. | Jun 07, 2012, 00:40AM IST
 
 


पाकुड़.झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 300 किलोमीटर दूर पाकुड़ जिले में बीते दो दिनों से एक महिला के जिंदा होने पर भी एक निजी अस्पताल के डॉक्टर द्वारा उसे मृत घोषित किए जाने का एक अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है। किसी फिल्म की तरह इस घटना के भी बदलते कई स्वरूप हैं।

 


 

क्या है मामला ?


 

दरअसल, जिले के हिरणपुर प्रखण्ड के खिजूरडांगा निवासी बाबूराम हेम्ब्रम की पत्नी बिटी सोरेन गर्भवती थी और उन्हें अंतिम समय में बीते सोमवार को बेहतर ईलाज के लिए पाकुड़ स्थित आलम नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।


 

बिटी सोरेन ने सिजेरियन के माध्यम से एक बच्ची को जन्म दिया, दुर्भाग्यसे उनका ईलाज कर रहे डॉक्टर एसजे अहमद ने जज्चा व बच्चा को मृत्त घोषित कर दिया, इतना ही नहीं मंगलवार की सुबह उनके परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र भी सौंप दिया। उनके परिजन बेहद ही दुखी मन से दोनों को मृत मानकर लाश को अपने घर ले गए और अन्य परिजन व ग्रामीणों के साथ दोनों के लाश को दफनाने की कवायद शुरू हो गई।


 

बिटी के पति बाबूलाल हेब्रम, भाई अमीन सोरेन, मेनेजर सोरेन, बहन दीबी सोरेन, ग्राम-प्रधान सुनीराम हेब्रम व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सबसे पहले मृत बच्ची को दफनाया गया और बिटी सोरेन के लिए भी कब्र खोद दी गई। बिटी सोरेन को कब्र में डालने के क्रम में ही उसने अचानक अपनी आंखें खोलीं और पानी मांगने लगी। पहले तो लोग डर गए लेकिन बाद में इसे दैविक चमत्कार समझ कर उसे घर ले आए।


 

परिजन दुबारा उसे पाकुड़ के डॉक्टर एस एन साहा के पास ले गए परन्तु, उन्होंने अपना डॉक्टरी धर्म न निभाते हुए मरीज को वापस आलम नर्सिंग होम भेज दिया। आलम नर्सिंग होम में दुबारा बिटी सोरेन को मृत करार दिया गया। निराश परिजन उसे वापस घर ले आए और अगले 24 घंटे तक उसकी सेवा करते रहे।


 

बिटी सोरेन के लगातार बिगडते हालत के मद्देनजर उसे सोनाजोरी स्थित सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन बुधवार दोपहर अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही बिटी सोरेन की मृत्यु हो चुकी थी। डॉक्टर एसके झा के अनुसार मरीज की मौत महज कुछ घंटे पूर्व ही हुई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या समय रहते बिटी सोरेन को बचाया जा सकता था या फिर आए दिन डाक्टरों की लापरवाही से मासूमों की जानें जाती रहेंगी।

 
 
 

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