कंपनियां नहीं खरीद रहीं जमीन
Source: संतोष कुमार | Last Updated 09:01(10/02/12)
जमशेदपुर। झारखंड में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के ताजा विवाद के बाद कंपनियों ने जमीन खरीदनी बंद कर दी है या उसकी प्रक्रिया धीमी कर दी है। इस कारण कोल्हान में नई औद्योगिक इकाइयां लगाने का काम और रियल इस्टेट का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक केवल रियल इस्टेट में ही 500 करोड़ रुपए का निवेश रुक गया है।
राज्य में पहले ही जमीन अधिग्रहण में वन विभाग की पेंच और रैयतों का विरोध बड़े औद्योगिक घरानों को झेलना पड़ रहा था। अब सीएनटी के नए विवाद से कंपनियों ने रैयतों से जमीन खरीदना बंद कर दिया है। साथ ही निबंधन विभाग ने ओबीसी व एससी की जमीन की रजिस्ट्री बंद कर दी है। इन सब कारणों से जिंदल स्टील का आसनबनी प्रोजेक्ट, पोटका में भूषण स्टील, चांडिल में टाटा पावर के प्रोजेक्ट सहित कई कंपनियों के नए प्लांट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
असर
> टाटा पावर, जिंदल पावर, भूषण स्टील एंड पावर समेत रियल एस्टेट से जुड़ी कई कंपनियों ने जमीन खरीदनी बंद कर दी है।
> भवन निर्माण के क्षेत्र में शहर में 50 से अधिक कंपनियां हैं, जो अब न तो जमीन खरीद रही हैं और न ही रजिस्ट्री हो रही है। इससे लगभग 500 करोड़ की योजनाएं रुक गई हैं।
> कोल्हान प्रमंडल में दुनिया की नंबर एक स्टील निर्माता कंपनी आर्सेलर मित्तल, एस्सार, जिंदल स्टील कंपनी समेत कई कंपनी पूंजीनिवेश को इच्छुक है। मगर अब इन कंपनियों के पूंजीनिवेश पर ग्रहण लग गया है।
सीएनटी के नए विवाद के बाद कंपनी ने जमीन की खरीद बंद कर दी है। जमीन का निबंधन भी पूरी तरह से बंद है। सरकार को इस विवाद का समाधान करने की पहल करनी होगी।
एके सक्सेना, उपाध्यक्ष, भूषण स्टील एंड पावर लिमिटेड
सरकार का आदेश अब तक नहीं मिला है। बावजूद इसके सीएनटी एक्ट का पालन करते हुए निबंधन किया जा रहा है। ओबीसी व एससी एसटी की जमीन का निबंधन बंद कर दिया गया है।
रमाकांत तिवारी, सहायक निबंधक, निबंधन विभाग।
बैंक अब रियल इस्टेट क्षेत्र में लोन नहीं दे रहे हैं। नए विवाद से रियल इस्टेट कारोबार में शहरी व आसपास के क्षेत्रों में करीब 500 करोड़ की योजना बंद हो जाएगी और इससे करीब 20 हजार मजदूरों को रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न होगी। सरकार को पूरे मामले में बीच का रास्ता खोजना चाहिए।
शिबू बर्मन, उपाध्यक्ष, बिल्डर एसोसिएशन।