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अधिक विकासशील रहा झारखंड सरकार का बजट
मुकेश बालयोगी
| Dec 05, 2012, 10:40AM IST

रांची। झारखंड सरकार की आर्थिक सेहत बिहार से बेहतर है। 2011-12 के बजटीय परिणामों के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक के निष्कर्ष इसकी गवाही देते हैं। आंकड़े बताते हैं कि बजट संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार की केंद्र पर निर्भरता बिहार से कम है। राजस्व के स्थानीय स्रोत आर्थिक विकास के परिणामों को गति देेते दिख रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों और खनिज व उद्योग से होने वाली आय में भेदभाव के बावजूद यह उपलब्धि आश्चर्यजनक है। इससे यहां परियोजनाओं के संचालन में तकनीकी कुशलता का संकेत मिलता है। झारखंड में घोटालों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद बिहार के सुशासन के साथ यह होड़ लेती दिखती है।
बिहार से अधिक सफल बजट
2011-12 के झारखंड सरकार के बजटीय परिणाम आबादी के हिसाब से बिहार से अधिक सफल होने की कहानी कहते हैं। प्रति व्यक्ति राजस्व प्राप्ति के मामले में झारखंड बिहार से अव्वल रहा। इसमें कर और केंद्रीय अनुदान से प्राप्त राशि को शामिल किया जाता है। बजट में प्रति व्यक्ति पूंजीगत व्यय के आंकड़े भी आबादी के हिसाब से इन्फ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक लाभ देने वाली दूसरी परियोजनाओं में तुलनात्मक रूप से बेहतर निवेश की कहानी कह रहे हैं। पुलिस बल की संख्या में भी सालाना वृद्धि बिहार से अधिक है। ये आंकड़े आर्थिक, प्रशासनिक और तकनीकी प्रबंधन के मोर्चे पर प्रदेश की स्थिति मजबूत बता रहे हैं।
झारखंड के लिए कड़ी चुनौती
झारखंड सामाजिक-आर्थिक विकास के पैमानों पर आगे बढ़ रहा है। लेकिन इसमें राज्य गठन के पूर्व की परिस्थितियां भी सहायक हैं। जबकि बिहार अपनी बदतर हालत से रिकवर कर रहा है। इसलिए कई आंकड़े झारखंड के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। बिहार में मानव विकास के पैमाने पर बेहतरी के आंकड़े बाद में दिखाई देंगे। विकास की प्रतियोगिता में आगे झारखंड के लिए कड़ी चुनौती का वक्त है। शैवाल गुप्ता, अर्थशास्त्री सह सचिव आद्री, पटना






